समिति के अनुसार, बदरवास और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों का ठहराव बढ़ने और स्टेशन पर आवश्यक सुविधाएं विकसित होने से यात्रियों को लाभ मिल सकता है। समिति ने अपनी मांगों में धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से संपर्क बेहतर करने पर जोर दिया है।
बदरवास रेलवे स्टेशन पर कई प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाई गई है। इनमें उज्जैनी एक्सप्रेस, झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस, लक्ष्मीबाई नगर इंदौर-योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस, ग्वालियर-बेंगलुरु एक्सप्रेस और अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस शामिल हैं। समिति का मानना है कि इन ट्रेनों का ठहराव मिलने से यात्रियों को उज्जैन, हरिद्वार, मथुरा-वृंदावन और अमृतसर जैसे धार्मिक स्थलों तक जाने में सुविधा होगी। साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे शहरों की यात्रा के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।
रेलवे स्टेशन के विकास को लेकर भी समिति ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें बदरवास स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करना, दूसरा प्लेटफॉर्म बनाना और फुट ओवरब्रिज का निर्माण करना शामिल है। समिति ने यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए प्लेटफॉर्म पर लंबे टीनशेड लगाने की मांग भी की है। फुट ओवरब्रिज बनने से यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार नहीं करना पड़ेगा। इससे आवागमन अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।
यात्री सुविधाओं को बेहतर करने के लिए स्टेशन पर टिकट रिजर्वेशन काउंटर खोलने, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की आउटपोस्ट स्थापित करने और ट्रेनों की जानकारी देने के लिए कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। समिति का कहना है कि इन सुविधाओं से यात्रियों को टिकट संबंधी सेवाओं, सुरक्षा और ट्रेन में अपने कोच की स्थिति जानने में सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टेशन पर रैक प्वाइंट विकसित करने की मांग भी शामिल की गई है।
समिति ने क्षेत्रीय रेल संपर्क मजबूत करने के लिए गुना, अशोकनगर या रुठियाई से ग्वालियर के बीच मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही इंदौर-ऊना हिमाचल एक्सप्रेस को प्रतिदिन संचालित करने की मांग की गई है। उधना-बनारस एक्सप्रेस और ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाकर सप्ताह में तीन से चार दिन करने का आग्रह भी किया गया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यात्रियों को अधिक नियमित रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
समिति के गोविंद अवस्थी ने बताया कि इन मांगों के पूरा होने से बदरवास और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, इलाज, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से रेल मंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद समिति को उम्मीद है कि रेलवे मंत्रालय इन प्रस्तावों पर विचार करेगा और क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा। हालांकि, इन मांगों पर रेलवे मंत्रालय की ओर से निर्णय और उनके क्रियान्वयन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
