विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान शरीर हमेशा एक जैसे संकेत नहीं देता। कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन कमर में दर्द मतली थकान सांस फूलना ठंडा पसीना और कमजोरी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। कई बार पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द इतना सामान्य लगता है कि मरीज उसे गैस बदहजमी या पीरियड्स की समस्या मान लेता है जबकि वास्तव में यह हृदय से जुड़ी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यदि समय रहते उपचार न मिले तो हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए विशेष रूप से तब जब उसके साथ सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक थकान चक्कर या सीने में दबाव जैसा महसूस हो।
महिलाओं में हार्ट अटैक के कई लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग हो सकते हैं। इनमें गर्दन कंधे पीठ या जबड़े में दर्द अत्यधिक पसीना उल्टी जैसा महसूस होना अचानक कमजोरी बेचैनी और बिना किसी कारण सांस फूलना शामिल है। यदि पीरियड्स जैसा दर्द सामान्य समय से अलग महसूस हो रहा हो या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा धूम्रपान तनाव अनियमित जीवनशैली और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि इस समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी माना जाता है।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और धूम्रपान तथा शराब से दूरी बनाए रखना सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच भी करानी चाहिए। यदि परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
ध्यान रखें कि हर पेट दर्द या पीरियड्स जैसा दर्द हार्ट अटैक का संकेत नहीं होता लेकिन यदि यह दर्द असामान्य हो और उसके साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दबाव ठंडा पसीना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार ही हार्ट अटैक से होने वाले गंभीर नुकसान और जान के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
