केंद्रीय कर्मचारियों को वर्तमान में उनके मूल वेतन का 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। यदि सरकार इसमें 3 प्रतिशत अंक की वृद्धि को मंजूरी देती है, तो डीए बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, 4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी होने पर यह 64 प्रतिशत और 5 प्रतिशत अंक की वृद्धि पर 65 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि, 4 और 5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इन संभावनाओं को निश्चित फैसला मानना सही नहीं होगा।
इससे पहले कर्मचारियों को उम्मीद थी कि 14 अक्टूबर को दशहरा से पहले होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में महंगाई भत्ते पर फैसला हो सकता है। हालांकि, उस बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के उत्पादकता आधारित बोनस को मंजूरी दी गई थी, लेकिन डीए बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई। इसके बाद अब कर्मचारियों की निगाहें 21 अक्टूबर की संभावित बैठक पर हैं। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अगली बैठक में घोषणा होने की उम्मीद जताई है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार को ही लेना है।
महंगाई भत्ते की संभावित दर तय करने के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक औद्योगिक श्रमिक यानी एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू कहा जाता है। यह सूचकांक औद्योगिक श्रमिकों के लिए वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। इसी के आधार पर महंगाई के प्रभाव का आकलन कर डीए की दर निर्धारित करने में मदद मिलती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 151.9 रहा था। जुलाई 2026 से लागू होने वाली डीए की अगली किस्त की गणना के लिए जुलाई 2025 से जून 2026 तक के 12 महीनों के औसत सूचकांक को ध्यान में रखा जाता है। इसी अवधि के आंकड़ों के आधार पर 3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, सूचकांक से निकला संभावित आंकड़ा अपने आप सरकारी मंजूरी नहीं बन जाता। अंतिम दर सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
यदि डीए 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत होता है, तो कर्मचारियों के मासिक वेतन में मूल वेतन के अनुपात में अतिरिक्त राशि जुड़ेगी। उदाहरण के लिए, 18,000 रुपये मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी को अभी 60 प्रतिशत की दर से 10,800 रुपये महंगाई भत्ता मिलता है। दर बढ़कर 63 प्रतिशत होने पर यह राशि 11,340 रुपये हो जाएगी। इस तरह कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। 12 महीने के आधार पर यह अंतर 6,480 रुपये होगा। यह गणना केवल महंगाई भत्ते की है, इसमें अन्य भत्तों और वेतन कटौतियों को शामिल नहीं किया गया है।
यदि सरकार जुलाई 2026 से प्रभावी डीए वृद्धि को मंजूरी देती है, तो पात्र कर्मचारियों को जुलाई से बकाया राशि मिलने की संभावना भी रहेगी। हालांकि, एरियर कितने महीनों का होगा और उसका भुगतान कब किया जाएगा, यह आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मंत्रिमंडल के संभावित फैसले का इंतजार है।
