इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को पड़ रही है और उदया तिथि के अनुसार इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। यह अवधि 20 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस दौरान सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक—ये चार पवित्र महीने शामिल रहेंगे।
सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व
चातुर्मास का पहला महीना सावन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना और शिव सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की उपासना से वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य, ग्रह दोष और मनोकामनाओं से जुड़े मामलों में शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा।
भाद्रपद में श्रीकृष्ण और गणेश आराधना
चातुर्मास का दूसरा महीना भाद्रपद भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इसी महीने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश उत्सव जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान श्रीमद्भागवत का पाठ, श्रीकृष्ण की आराधना और भक्ति करने से सुख-शांति, प्रेम और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस वर्ष भाद्रपद 29 अगस्त से 26 सितंबर तक रहेगा।
आश्विन में शक्ति उपासना और पितृ पक्ष
चातुर्मास का तीसरा महीना आश्विन देवी साधना और पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी महीने शारदीय नवरात्रि और पितृ पक्ष आते हैं। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी आराधना और पितरों का स्मरण विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन में शक्ति, सौभाग्य और विजय की प्राप्ति होती है। इस वर्ष आश्विन 27 सितंबर से 26 अक्टूबर तक रहेगा।
कार्तिक में फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
चातुर्मास का अंतिम महीना कार्तिक होता है। इसी दौरान दीपावली, तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, जिसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा होती है। कार्तिक मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। इस वर्ष कार्तिक 27 अक्टूबर से 24 नवंबर तक रहेगा।
