गणपति को विराजमान करने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी की जरूरत होती है। चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पूजा के अनुकूल साफ कपड़ा रखा जा सकता है। इसी स्थान पर गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्ति के साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी की गांठ और सिक्का जैसी पूजा सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।
गणेश स्थापना में कलश का भी महत्व बताया गया है। इसके लिए तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल और कलावा जैसी सामग्री जुटाकर रखी जा सकती है। पूजा के समय इन चीजों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इन्हें पहले से एक स्थान पर रखना सुविधाजनक रहेगा।
गणपति पूजा की सामग्री में दूर्वा और सुपारी भी खास तौर पर शामिल की जाती है। बप्पा को अर्पित करने के लिए ताजे फूल भी तैयार रखें। इसके अलावा जनेऊ, पानी वाला नारियल और गुड़-नारियल का गोला भी पूजा की सामग्री में रखा जा सकता है। इनका इस्तेमाल पूजा और भोग की तैयारी में किया जाता है।
भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा तैयार रखना चाहिए। यदि घर पर मोदक बनाने की तैयारी है तो उन्हें पूजा के समय से पहले बनाकर रख लेना बेहतर रहेगा। पंचामृत भी पूजा के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे स्थापना और पूजा के दौरान जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रहेगी।
पूजा की थाली में घी का दीपक और धूप भी जरूर रखें। आरती और पूजा के दौरान इनकी जरूरत होती है। पूजा की सभी छोटी-बड़ी चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से स्थापना के समय सामान तलाशने में परेशानी नहीं होगी।
गणेश चतुर्थी की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल होता है। इसलिए आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पूजा का सामान एक दिन पहले ही जुटा लेना बेहतर रहेगा। चौकी, कपड़ा, गणपति मूर्ति, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, सिक्का, कलश, गंगाजल, पत्ते, नारियल, कलावा, सुपारी, दूर्वा, फूल और जनेऊ जैसी सामग्री की तैयारी पहले की जा सकती है।
इसी तरह भोग के लिए मोदक या लड्डू, फल, पंचमेवा और पंचामृत भी समय से तैयार रखें। दीपक और धूप को भी पूजा की सामग्री के साथ रख दें। इस तरह गणपति स्थापना के समय जरूरी सामान पहले से तैयार रहेगा और पूजा की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।
