राष्ट्रपति ने सुवर्णा राज को विशेष रूप से बधाई देते हुए उनकी सफलता को ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली सुवर्णा की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह कामयाबी उनकी असाधारण क्षमताओं का परिणाम है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि सुवर्णा की उपलब्धि अन्य खिलाड़ियों को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने के लिए प्रेरित करेगी। उनका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
तीरंदाजी में सिल्वर मेडल जीतने वाली स्वाति चौधरी को भी राष्ट्रपति ने बधाई दी। महिलाओं की व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में पदक जीतकर स्वाति ने भारत के लिए एक नई उपलब्धि दर्ज की। राष्ट्रपति ने उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता इस खेल से जुड़े अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा देगी। उन्होंने स्वाति के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि वह आगे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी।
बैडमिंटन में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। महिला डबल्स व्हीलचेयर बैडमिंटन में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली अल्फिया जेम्स और पल्लवी केएम को राष्ट्रपति ने बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस स्पर्धा में भारत के लिए पहला पदक जीतना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन से देश में पैरा खेलों को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
पुरुषों की बैडमिंटन सिंगल्स स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले अभिजीत सखूजा की भी राष्ट्रपति ने प्रशंसा की। अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर ही पदक हासिल करना उनके लिए खास उपलब्धि रही। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह शानदार शुरुआत भविष्य में और सफलताओं का रास्ता खोलेगी।
बैडमिंटन मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज जीतने वाली सुमति सिवन और कृष्णा नागर की जोड़ी को भी बधाई दी गई। राष्ट्रपति ने टूर्नामेंट के दौरान उनके जज्बे और प्रदर्शन की सराहना की। इसके साथ ही प्रमोद भगत और मनीषा रामदास को भी मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक जीतने पर शुभकामनाएं दी गईं। उन्होंने खिलाड़ियों के टीम वर्क और खेल के प्रति समर्पण को सराहा।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर पदक के पीछे लंबे समय तक की गई मेहनत और तैयारी होती है। एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की सफलताएं उनकी प्रतिभा और लगन को दर्शाती हैं। इन उपलब्धियों से पैरा खेलों को नई पहचान मिलने के साथ ही देश के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों को भी अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा मिलेगी।
