मंडल-बस्ती को धुरी और शाखा को आधार बनाकर गुणात्मक कार्यविस्तार का लक्ष्य, मालवा प्रांत की वार्षिक बैठक रतलाम में प्रारंभ

रतलाम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को समाज जीवन में व्यापक जनसंपर्क, संगठन विस्तार और सामाजिक जागरण के वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में मालवा प्रांत की तीन दिवसीय वार्षिक प्रांत बैठक का शुभारंभ रतलाम में भारत माता पूजन के साथ हुआ। बैठक का उद्घाटन प्रांत संघचालक प्रकाश शास्त्री एवं प्रांत कार्यवाह विनीत नवाथे ने किया।
12 जून की सायंकाल से प्रारंभ हुई यह बैठक 14 जून तक चलेगी, जिसमें प्रांत कार्यकारिणी, विभाग कार्यकारिणी तथा जिला स्तर की टोलियों के प्रमुख कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में प्रांत कार्यवाह विनीत नवाथे ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए आगामी वर्ष की कार्ययोजना और संगठनात्मक लक्ष्यों की जानकारी दी।
शताब्दी वर्ष में हर हिंदू तक पहुंचेगा संघ का विचार
प्रतिवेदन में बताया गया कि संघ स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संगठन ने मंडल-बस्ती को कार्य की धुरी तथा शाखा-बस्ती को आधार बनाकर प्रत्येक हिंदू परिवार तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया है। समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर प्रत्येक गांव और मोहल्ले में सक्रिय हिंदू टोली के निर्माण का संकल्प लिया गया है।
पिछले वर्ष मार्च माह से ही वृहद शाखा बैठकों के माध्यम से “पंच परिवर्तन” के संकल्प को स्वयंसेवकों, परिवारों और समाज तक पहुंचाने का अभियान प्रारंभ किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत हुआ मालवा प्रांत
प्रतिवेदन के अनुसार मालवा प्रांत के 1,359 ग्रामीण मंडलों में से 1,269 मंडल शाखायुक्त हैं, जबकि शेष मंडलों में साप्ताहिक मिलन अथवा मासिक मंडली संचालित हो रही है। 23 ग्रामीण जिलों में से 17 जिले और 138 खंडों में से 96 खंड पूर्ण कार्यस्थिति में हैं।
प्रांत के 12,885 गांवों में से 6,509 गांव कार्ययुक्त हैं। महानगरों और नगरों में भी संगठन का विस्तार निरंतर बढ़ रहा है। 968 बस्तियों में से 953 बस्तियां शाखा या मिलन से जुड़ी हुई हैं। पिछले वर्ष की तुलना में 246 नए शाखा स्थान जुड़े हैं और वर्तमान में कुल 3,292 शाखा स्थान संचालित हो रहे हैं।
विजयादशमी उत्सव में 45 हजार से अधिक स्वयंसेवकों की भागीदारी
संघ के शताब्दी वर्ष का शुभारंभ विजयादशमी उत्सव और पथ संचलनों के साथ हुआ। मालवा प्रांत में आयोजित 1,472 संचलनों में 45,075 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में 1,333 मंडलों और 969 बस्तियों का प्रतिनिधित्व रहा।
बाल स्वयंसेवकों की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही। प्रांत के 142 नगरों में आयोजित बाल संचलनों में 34,878 बाल स्वयंसेवक शामिल हुए।
32 लाख परिवारों तक पहुंचा गृह संपर्क अभियान
संघ विचार को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए गए वृहद गृह संपर्क अभियान के तहत स्वयंसेवक 12,246 गांवों और 969 बस्तियों के लगभग 32 लाख परिवारों तक पहुंचे। संपर्क के दौरान साहित्य, करपत्रक और स्टिकर वितरित किए गए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के 20 लाख घरों में भारत माता के चित्र भेंट किए गए।
सामाजिक सद्भाव और समरसता पर विशेष जोर
सामाजिक समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रांत के 112 खंडों और 59 नगरों में सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में 462 महिलाओं सहित 10,840 समाजजन सहभागी बने।
प्रांत स्तरीय सामाजिक सद्भाव बैठक में 111 विभिन्न समाजों के 285 प्रमुख व्यक्तियों को सरसंघचालक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
हिंदू सम्मेलनों में 68 लाख से अधिक समाजजन जुड़े
मालवा प्रांत में आयोजित हिंदू सम्मेलनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का व्यापक प्रयास किया गया। आयोजन समितियों के सहयोग से आयोजित कार्यक्रमों में 20.87 लाख परिवारों और 68.55 लाख समाजजनों की सहभागिता रही।
इन सम्मेलनों में 2,521 संतों का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प भी समाजजनों ने लिया।
युवाओं को जोड़ने के लिए विविध कार्यक्रम
युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। 171 युवा संगम कार्यक्रमों में 72,314 युवाओं की सहभागिता रही, जबकि युवा शिविरों में 1,336 युवा शामिल हुए।
इसके अलावा युवा संसद, यंग थिंकर्स कॉन्फ्लुएंस, युवा महोत्सव, भारत शिखर सम्मेलन तथा समर्थ राष्ट्र दौड़ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रीय चेतना का विस्तार किया गया।
पर्यावरण, साहित्य और भारतीय चिंतन पर भी फोकस
भूमि सुपोषण अभियान के अंतर्गत 31 हजार से अधिक समाजजनों ने धरती माता का पूजन किया। भारतीय चिंतन और सांस्कृतिक दृष्टि के प्रसार हेतु तीन दिवसीय नर्मदा साहित्य मंथन का आयोजन भी किया गया।
इसके अतिरिक्त शताब्दी वर्ष के विषयों पर केंद्रित प्रवासी भारतीय परिवारों के मिलन कार्यक्रम तथा संघ गीतों की प्रस्तुति “आदरांजलि” जैसे सांस्कृतिक आयोजन भी संपन्न हुए।
आगामी वर्ष की रणनीति पर मंथन
तीन दिवसीय प्रांत बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक प्रभाव, सेवा गतिविधियों, युवा सहभागिता, पंच परिवर्तन अभियान तथा शताब्दी वर्ष के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी रणनीति पर व्यापक चर्चा की जा रही है। बैठक में मालवा प्रांत के विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ता भाग लेकर आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देंगे।
