इंदौर/दमोह, 20 जून। मध्य प्रदेश में मंडी शुल्क वृद्धि को लेकर व्यापारिक संगठनों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के अनाज, दलहन और तिलहन कारोबार से जुड़े व्यापारी अब इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश व्यापारी संघ ने 23 जून को प्रदेशभर की मंडियों में एक दिवसीय व्यापार बंद का आह्वान किया है।
प्रदेश व्यापारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने इंदौर में आयोजित बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मंडी शुल्क में की गई वृद्धि से प्रदेशभर के व्यापारी वर्ग में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार ने व्यापारियों की आपत्तियों और सुझावों पर गंभीर विचार किए बिना ही अधिसूचना जारी कर नई दरें लागू कर दीं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
संघ के अनुसार, पूर्व में मुख्यमंत्री से हुई चर्चा के दौरान व्यापारियों से अन्य राज्यों की मंडी शुल्क व्यवस्था और आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा गया था। व्यापारियों को उम्मीद थी कि विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा, लेकिन इसी बीच कृषि विभाग और मंडी बोर्ड द्वारा जल्दबाजी में गजट प्रकाशित कर नई शुल्क दरों को 16 जून से प्रभावी कर दिया गया।
इंदौर में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक, आंदोलन की बनी रणनीति
18 जून को इंदौर में प्रदेश की विभिन्न मंडियों के पदाधिकारियों और व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार से पुनः चर्चा कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो 23 जून को प्रदेश की सभी मंडियों में व्यापार बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि मंडी शुल्क में वृद्धि का सीधा असर व्यापार लागत पर पड़ेगा, जिसका बोझ अंततः किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को उठाना पड़ सकता है। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि नई शुल्क व्यवस्था पर तत्काल पुनर्विचार करते हुए सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित किया जाए।
दमोह के व्यापारी भी आंदोलन के समर्थन में
दमोह जिले में भी व्यापारियों ने मंडी शुल्क वृद्धि का विरोध करते हुए प्रदेश व्यापारी संघ के निर्णय का समर्थन किया है। दमोह जिला अध्यक्ष नरेंद्र बजाज ने कहा कि मंडी शुल्क में बढ़ोतरी से स्थानीय व्यापार प्रभावित होगा और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
नरेंद्र बजाज ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार दमोह जिले के व्यापारी भी 23 जून को प्रस्तावित एक दिवसीय व्यापार बंद में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग सरकार से टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन यदि उनकी समस्याओं की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
उन्होंने जिले के सभी अनाज, दलहन और तिलहन व्यापारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि व्यापारी हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और सरकार को व्यापारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
व्यापारियों का कहना है कि मंडी शुल्क में वृद्धि से प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी और अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश के व्यापारियों की स्थिति कमजोर हो सकती है। प्रदेश व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री से शीघ्र बैठक कर व्यापारी हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
व्यापारियों का मानना है कि यदि शुल्क वृद्धि को वापस नहीं लिया गया तो इसका असर केवल व्यापार पर ही नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। ऐसे में सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच सकारात्मक संवाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है।
अब प्रदेशभर के व्यापारियों की निगाहें सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो 23 जून का प्रस्तावित व्यापार बंद प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में व्यापक असर डाल सकता है।
