फिल्म के निर्माण के दौरान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने इस गीत को शुरुआती शीर्षक या बैकग्राउंड संगीत के रूप में रखने का विचार बनाया था। गीतकार योगेश के लिखे शब्द और संगीत की गहराई के बावजूद इसे किसी दृश्य पर फिल्माने की योजना नहीं थी। उस दौर में बैकग्राउंड में इस्तेमाल होने वाले कई गीत दर्शकों तक व्यापक रूप से नहीं पहुंच पाते थे।
बताया जाता है कि जब राजेश खन्ना ने जिंदगी कैसी है पहेली सुना तो वह इसके भाव और शब्दों से बेहद प्रभावित हुए। उन्हें लगा कि इतना प्रभावशाली गीत केवल बैकग्राउंड में सीमित रह जाएगा तो दर्शक उसकी पूरी खूबसूरती महसूस नहीं कर पाएंगे। उन्होंने निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से आग्रह किया कि इस गीत के लिए फिल्म में एक उपयुक्त दृश्य तैयार किया जाए, ताकि इसे कहानी का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।
राजेश खन्ना के इस सुझाव को स्वीकार किया गया और गीत को फिल्म की कथा के साथ जोड़ा गया। पर्दे पर उनके सहज अभिनय और मन्ना डे की भावपूर्ण आवाज ने इस गीत को ऐसी ऊंचाई दी कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाने लगा। जीवन, मृत्यु और मानवीय भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करने वाला यह गीत आज भी हर पीढ़ी के दर्शकों को समान रूप से प्रभावित करता है।
आनंद की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद जीवन को पूरी सकारात्मकता और मुस्कान के साथ जीने में विश्वास रखता है। फिल्म में राजेश खन्ना ने आनंद का किरदार निभाया, जबकि अमिताभ बच्चन डॉक्टर भास्कर के रूप में दिखाई दिए। दोनों कलाकारों की अभिनय क्षमता और ऋषिकेश मुखर्जी के संवेदनशील निर्देशन ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में स्थान दिलाया।
फिल्म के संवाद भी उतने ही लोकप्रिय हुए जितने इसके गीत। “बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं” जैसे संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इसी तरह कहीं दूर जब दिन ढल जाए, मैंने तेरे लिए, ना जिया लगे ना और जिंदगी कैसी है पहेली जैसे गीत समय की कसौटी पर खरे उतरे और आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।
जिंदगी कैसी है पहेली की लोकप्रियता केवल इसकी धुन या गायकी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह गीत जीवन के दर्शन को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने के कारण भी विशेष पहचान रखता है। राजेश खन्ना की दूरदर्शिता और निर्देशक के फैसले ने एक ऐसे गीत को जन्म दिया, जो आज भी भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर माना जाता है और नई पीढ़ी के बीच भी उतनी ही श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ सुना जाता है।
