फुटेरा, पुरैना और बेलाताल के घाटों पर स्वच्छता, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था के दिए निर्देश; भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन हुआ सतर्क
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। आगामी दिनों में गणेश उत्सव, गणेश प्रतिमा विसर्जन, पितृपक्ष और इसके बाद नवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक पर्वों को देखते हुए दमोह जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुरुवार 10 सितंबर को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने शहर के प्रमुख सरोवरों और घाटों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने फुटेरा तालाब, पुरैना तालाब और बेलाताल के घाटों का अवलोकन किया। इसके साथ ही गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले मार्ग का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए।
आने वाले दिनों में लगातार बड़े धार्मिक आयोजन
दमोह शहर में आने वाले दिनों में लगातार धार्मिक आयोजन होने हैं। गणेश उत्सव के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन झांकियों को देखने पहुंचते हैं। गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के बाद विसर्जन के समय भी विभिन्न स्थानों से चल समारोह निकलते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रहती है।
गणेश उत्सव के तत्काल बाद पितृपक्ष शुरू होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सरोवरों और घाटों पर तर्पण एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं करने पहुंचते हैं। इसके बाद नवरात्रि का पर्व भी शुरू होगा। ऐसे में प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में लगातार भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने की चुनौती रहेगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक द्वारा पर्वों से पहले ही संबंधित स्थानों का निरीक्षण किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेलाताल को लेकर विशेष चुनौती
निरीक्षण के दौरान बेलाताल का क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण नजर आया। बेलाताल में करोड़ों रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण और विकास से जुड़े कार्य कराए गए हैं। यहां पेड़-पौधे, प्रकाश व्यवस्था, व्यायाम के उपकरण और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं।
ऐसे में गणेश प्रतिमा विसर्जन या अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने पर इन सुविधाओं की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। भीड़ को निर्धारित क्षेत्र में नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों को नुकसान से बचाना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
पूर्व में बेलाताल में प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रतिबंध की स्थिति भी सामने आ चुकी है। ऐसे में अब प्रशासन द्वारा जिस क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है, वहां आगामी धार्मिक आयोजनों के दौरान व्यवस्थाएं किस प्रकार संचालित होती हैं, यह देखने वाली बात होगी।
सवाल केवल व्यवस्था बनाने का नहीं, उसे सुरक्षित रखने का भी
धार्मिक आयोजनों से पहले प्रशासन द्वारा तैयारियां करना आवश्यक है, लेकिन उतनी ही महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोजन के दौरान तैयार की गई व्यवस्थाओं की निगरानी भी प्रभावी ढंग से हो। विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर जहां करोड़ों रुपये खर्च कर विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य किए गए हैं, वहां भीड़ के दबाव और अव्यवस्था से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
बेलाताल में लगी लाइट, पेड़-पौधे, व्यायाम उपकरण और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को सुरक्षित रखना भी नगर पालिका और प्रशासन की चुनौती होगी। छोटी सी लापरवाही किसी बड़ी समस्या को जन्म दे सकती है।
नगर पालिका की भूमिका पर भी नजर
त्योहारों के दौरान शहर की व्यवस्थाओं में नगरीय निकाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। घाटों की सफाई, कचरा प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था, रास्तों की साफ-सफाई और आवश्यक स्थानों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका से जुड़ी रहती है।पिछले लंबे समय से शहर में त्योहारों के दौरान व्यवस्थाओं और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में इस बार प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के बाद नगर पालिका अपनी जिम्मेदारियों को किस स्तर तक पूरा करती है, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।
शांति समिति के निर्णयों के पालन पर भी सवाल
पिछले आयोजनों के दौरान शांति समिति की बैठकों में कई महत्वपूर्ण निर्णय और दिशा-निर्देश सामने आते रहे हैं। हालांकि, इन निर्णयों और प्रशासनिक निर्देशों का धरातल पर कितना पालन हुआ, इसको लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।इस बार प्रशासन और पुलिस पहले से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। निरीक्षण को इसी तैयारी की कड़ी माना जा रहा है। अब यह जरूरी होगा कि शांति समिति की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय केवल बैठक तक सीमित न रहें, बल्कि संबंधित विभागों और आयोजन समितियों द्वारा उनका वास्तविक पालन भी सुनिश्चित किया जाए।
ध्वनि प्रदूषण पर भी रहेगी चुनौती
पूर्व के धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। तेज आवाज में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल, निर्धारित समय के बाद भी ध्वनि उपकरणों का संचालन और वाहनों में नियम विरुद्ध ध्वनि उपकरणों का इस्तेमाल प्रशासन के लिए चुनौती रहा है।हाल ही में दमोह पुलिस द्वारा मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर और प्रेशर हॉर्न के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि आगामी धार्मिक आयोजनों के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को लेकर पुलिस और प्रशासन सख्ती बरतेंगे।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
त्योहारों के दौरान व्यवस्थाओं में कमी सामने आने पर अक्सर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की स्थिति बन जाती है। लेकिन इस बार यदि प्रशासन पहले से निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर रहा है, तो आयोजन समाप्त होने के बाद यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किस विभाग को कौन सी जिम्मेदारी दी गई थी और उसका पालन किस स्तर तक हुआ।पूर्व के आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण, यातायात अव्यवस्था, सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जो शिकायतें सामने आईं, उन मामलों में कितनी कार्रवाई हुई और किसकी जिम्मेदारी तय की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी आम नागरिकों के सामने बहुत कम दिखाई देती है। इस कारण इस बार लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन केवल निरीक्षण और निर्देश तक सीमित न रहे, बल्कि पालन की निगरानी भी करे।
श्रद्धालुओं से भी सहयोग की अपेक्षा
धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने में प्रशासन और पुलिस के साथ आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों से अपेक्षा होगी कि वे प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और मार्गदर्शन का पालन करें।गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान निर्धारित मार्ग और घाटों का उपयोग, भीड़ को नियंत्रित रखने में सहयोग, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना, स्वच्छता बनाए रखना और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी होगी।
प्रशासन की परीक्षा भी, आयोजन समितियों की भी
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी द्वारा त्योहारों से पहले ही प्रमुख सरोवरों और विसर्जन मार्ग का निरीक्षण किए जाने से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार प्रशासन व्यवस्थाओं को लेकर पहले से सजग रहना चाहता है।लेकिन वास्तविक परीक्षा त्योहार के दिनों में होगी। जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर होंगे, झांकियां निकलेंगी, विसर्जन चल समारोह आयोजित होंगे और घाटों पर भीड़ जुटेगी, तब प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।अब जिम्मेदारी केवल शासन-प्रशासन की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की भी है जिनके धार्मिक पर्व सामने हैं। नियम-कायदे और प्रशासन के दिशा-निर्देश तभी प्रभावी होंगे, जब उनका पालन आयोजन समितियों, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों द्वारा भी किया जाएगा।फिलहाल गणेश उत्सव और पितृपक्ष से पहले कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का सरोवरों का निरीक्षण यह संकेत देता है कि इस बार प्रशासन किसी भी संभावित अव्यवस्था को लेकर पहले से तैयारी करना चाहता है। अब देखना यह होगा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश धरातल पर कितनी तेजी से लागू होते हैं और नगर पालिका सहित संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाते हैं।
