पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, करोड़ों की संपत्तियां, नकदी, दस्तावेज और विदेश यात्रा की जानकारी जांच के दायरे में
रिपोर्ट: आचार्य नारायण वैष्णव
इंदौर | 6 अगस्त 2026/महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में पदस्थ एक फार्मासिस्ट के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। सरकारी दवाओं के स्टॉक में कथित अनियमितताओं की शिकायत से शुरू हुई जांच अब करोड़ों रुपये की संपत्ति तक पहुंच गई है। प्रारंभिक जांच में फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के पास उनकी वैध आय से 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद ईओडब्ल्यू ने उनके पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, नकदी और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
ईओडब्ल्यू के अनुसार राकेश गोरखे वर्ष 2007 से शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। जांच में अब तक सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर उनकी कुल वैध आय लगभग 1.11 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि उनके नाम और उनसे जुड़े निवेशों का मूल्य लगभग 2.13 करोड़ रुपये पाया गया है। इस प्रकार आय और संपत्ति के बीच लगभग 1.02 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है, जो ज्ञात आय की तुलना में करीब 108 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल यह आंकड़ा प्रारंभिक जांच पर आधारित है और आगे की पड़ताल में इसमें बदलाव संभव है।
दवाओं के स्टॉक की शिकायत से खुला पूरा मामला
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार मामले की शुरुआत एमवाय अस्पताल में सरकारी दवाओं के स्टॉक में कथित गड़बड़ी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में दवाओं के रखरखाव, वितरण और रिकॉर्ड में अनियमितताओं की बात सामने आई थी। इसके बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने गोपनीय रूप से जांच शुरू की।
जांच के दौरान फार्मासिस्ट की आय, बैंक खातों, संपत्तियों और निवेश से संबंधित दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया। वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देने पर ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर एक साथ पांच स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की।
पांच ठिकानों पर घंटों चली कार्रवाई
ईओडब्ल्यू की टीम ने सुबह से ही राकेश गोरखे से जुड़े पांच अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने आवास, कार्यालय और अन्य स्थानों पर मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच की। कार्रवाई कई घंटों तक चली, जिसमें बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, निवेश संबंधी फाइलें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।
जांच अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि इनमें किसी प्रकार के संदिग्ध लेन-देन या बेनामी निवेश के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
छह अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई
छापेमारी के दौरान ईओडब्ल्यू को इंदौर शहर में स्थित छह अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इनमें स्कीम-140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान प्रमुख है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 54.89 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अलावा सद्गुरु नंदी विहार कॉलोनी, साकार एनआरआई सिटी और साहिल इंद्रांचल होम्स में प्लॉट और अन्य निवेश की जानकारी भी मिली है। अधिकारियों को ओमेक्स डेवलपर्स के साथ हुए भुगतान और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी अलग से जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया, भुगतान किस माध्यम से किया गया और क्या इन लेन-देन में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी रही है।
नकदी, पासपोर्ट और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त
कार्रवाई के दौरान ईओडब्ल्यू ने करीब डेढ़ लाख रुपये नकद, पासपोर्ट, संपत्तियों की रजिस्ट्रियां, खरीद-बिक्री के अनुबंध, बैंक भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
पासपोर्ट की जांच में यह भी सामने आया कि राकेश गोरखे ने अक्टूबर 2023 में थाईलैंड की यात्रा की थी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि विदेश यात्रा के लिए विभागीय अनुमति ली गई थी या नहीं, यात्रा का खर्च किस स्रोत से वहन किया गया और क्या सरकारी सेवा नियमों का पालन किया गया था।
पत्नी की आय और निवेश भी जांच के दायरे में
ईओडब्ल्यू ने जांच का दायरा परिवार तक भी बढ़ा दिया है। राकेश गोरखे की पत्नी कीर्ति गोरखे शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं। जांच एजेंसी दोनों की आय, बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, निवेश, बीमा, शेयर, एफडी और अन्य वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है।
यदि जांच में संयुक्त निवेश, बेनामी संपत्ति या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से संपत्ति अर्जित करने के प्रमाण मिलते हैं तो उन पहलुओं की भी अलग से जांच की जाएगी।
बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की होगी गहन पड़ताल
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है। जब्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंक खातों, संपत्ति खरीद के भुगतान, निवेश के स्रोत, आयकर रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
आवश्यक होने पर संपत्तियों का स्वतंत्र बाजार मूल्यांकन भी कराया जाएगा, ताकि वास्तविक कीमत का पता लगाया जा सके। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि कहीं किसी रिश्तेदार या परिचित के नाम पर संपत्ति खरीदकर वास्तविक स्वामित्व छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच जारी
ईओडब्ल्यू ने स्पष्ट किया है कि मामला आय से अधिक संपत्ति और संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जांच पूरी होने के बाद यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, संपत्तियों के मूल्यांकन और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्तियां पूरी तरह वैध आय से अर्जित की गईं या इनमें किसी प्रकार की अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार से अर्जित धन का उपयोग हुआ।
