इंदौर | 6 अगस्त 2026/ बहुचर्चित डबल मर्डर केस में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए प्रेम प्रसंग के चलते एक युवती के माता-पिता की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी डीजे उर्फ धनंजय उर्फ शुभांशु यादव (25 वर्ष) को दोहरा आजीवन कारावास सुनाया है। यह मामला अभियोजन विभाग द्वारा चिन्हित जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में सूचीबद्ध था, जिसकी लगातार विशेष निगरानी और मासिक समीक्षा की जा रही थी।
28वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार रघुवंशी ने थाना एरोड्रम के विशेष प्रकरण क्रमांक 436/2021 में फैसला सुनाते हुए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (दो गणना) के तहत दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 460 के तहत 10 वर्ष, धारा 397 के तहत 7 वर्ष, तथा आयुध अधिनियम की धारा 25(1-बी)(बी) सहपठित धारा 4 के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास और 33 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया।
इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आरती भदौरिया ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन विभाग के उपनिदेशक राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे चिन्हित एवं जघन्य प्रकरण की सूची में रखा गया था। अभियोजन ने सुनवाई के दौरान 25 गवाहों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध हुआ।
प्रेम प्रसंग बना दोहरे हत्याकांड की वजह
यह दिल दहला देने वाली घटना 16-17 दिसंबर 2020 की रात रुकमणी नगर, छोटा बांगड़दा रोड, इंदौर में हुई थी। परिवार के सदस्य दादा-दादी के घर भोजन करने के बाद अपने-अपने घर लौट गए थे। अगली सुबह जब घर का दरवाजा नहीं खुला तो पुत्र ऋषभ शर्मा ने खिड़की से अंदर देखा। उसके पिता ज्योतिप्रसाद शर्मा फर्श पर और मां नीलम शर्मा बिस्तर पर खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़े थे। दोनों के शरीर पर धारदार हथियार से किए गए कई वार के निशान थे।
सूचना मिलते ही थाना एरोड्रम पुलिस मौके पर पहुंची और हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में ऐसे खुला हत्याकांड का राज
जांच के दौरान घर से मृतक की नाबालिग बेटी की कॉपी का एक पन्ना मिला, जिसमें हत्या की जिम्मेदारी लेने जैसा संदेश लिखा था। शुरुआत में पुलिस को मामला भटकाने की कोशिश लगी। इसके बाद घर के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें एक संदिग्ध युवक घर में आते-जाते दिखाई दिया। परिजनों ने उसकी पहचान बेटी के मित्र धनंजय के रूप में की।
पुलिस ने आरोपी धनंजय और एक बाल अपचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने हत्या करना स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार, घटना के समय पहने गए कपड़े तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। घटनास्थल से मिली च्यूइंग गम के डीएनए नमूने भी आरोपी से मेल खाने पर जांच को निर्णायक आधार मिला।
इसके बाद पुलिस ने हत्या के साथ लूट, घर में घुसकर अपराध और आयुध अधिनियम की धाराएं जोड़ते हुए न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। बाल अपचारी के विरुद्ध अलग से बाल न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया गया।
साक्ष्यों ने दिलाई सजा
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 25 गवाहों के बयान, वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्य, बरामदगी और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध किया। सभी साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने आरोपी को दोहरा आजीवन कारावास सहित अन्य कठोर सजाएं सुनाईं।
यह फैसला जघन्य अपराधों में प्रभावी विवेचना, वैज्ञानिक जांच और मजबूत अभियोजन की एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
