विशेष न्यायालय ने POCSO अधिनियम के तहत सुनाई सजा, 15 हजार रुपये का अर्थदंड; पीड़ित को 4 लाख रुपये प्रतिकर राशि देने की अनुशंसा
इंदौर। 13 वर्षीय बालक के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। इसके साथ ही कुल 15 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया।यह निर्णय 13 अगस्त 2026 को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय द्वारा थाना तिलकनगर के विशेष प्रकरण क्रमांक 308/2023 में सुनाया गया। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुश्री सीमा शर्मा ने पैरवी की।
उपनिदेशक अभियोजन श्री राजेन्द्र सिंह भदौरिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना वर्ष 2023 की है। पीड़ित बालक के पिता थाना तिलकनगर क्षेत्र में एक बंगले पर चालक के रूप में कार्य करते थे और बंगले के पीछे बने क्वार्टर में अपने परिवार के साथ रहते थे। उसी परिसर में आरोपी भी निवास करता था और बंगले पर खाना बनाने का काम करता था।
अभियोजन के अनुसार, 13 अक्टूबर 2023 की दोपहर पीड़ित बालक के पिता जब घर लौटे तो उनका पुत्र घर पर नहीं मिला। पूछताछ करने पर उन्हें जानकारी मिली कि बालक आरोपी के क्वार्टर से बाहर आया था। इसके बाद पिता द्वारा बालक से पूछताछ की गई तो उसने आरोपी द्वारा उसके साथ गलत कृत्य किए जाने की जानकारी दी।परिजनों द्वारा घटना की जानकारी संबंधित व्यक्ति को दी गई, लेकिन तत्काल उचित कार्रवाई नहीं होने पर 15 अक्टूबर 2023 को पीड़ित के पिता अपनी पत्नी एवं एक परिचित के साथ थाना तिलकनगर पहुंचे और घटना की सूचना पुलिस को दी।शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 377 तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने संबंधित साक्षियों के कथन दर्ज किए और आरोपी को गिरफ्तार किया। संपूर्ण विवेचना के बाद अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 9 साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष कराए गए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं अन्य तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और निर्धारित दंड से दंडित किया।
पीड़ित को 4 लाख रुपये प्रतिकर की अनुशंसा
मामले में न्यायालय ने पीड़ित प्रतिकर योजना के अंतर्गत पीड़ित बालक को हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए 4 लाख रुपये की प्रतिकर राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।न्यायालय के इस निर्णय को नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के मामलों में कानून की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। समाचार में पीड़ित बालक की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।
