तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाकर ई-रिक्शा को मारी थी पीछे से टक्कर, तीन धाराओं में हुई सजा
इंदौर। हातोद क्षेत्र में तेज रफ्तार और लापरवाही से टवेरा वाहन चलाकर ई-रिक्शा को पीछे से टक्कर मारने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और कुल 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि 3 सितंबर 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हातोद, जिला इंदौर, श्रीमती शिखा अग्रवाल ने थाना हातोद के प्रकरण क्रमांक 205/2023 में निर्णय पारित किया। न्यायालय ने आरोपी पंकज पिता रामराज सिसौदिया, उम्र 34 वर्ष, निवासी ग्राम रोजड़ी, थाना हातोद, जिला इंदौर को भारतीय दंड संहिता की धारा 338 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास तथा धारा 337 और 279 के तहत तीन-तीन माह के साधारण कारावास से दंडित किया। इसके साथ ही आरोपी पर कुल 2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री विनय चौहान ने पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार, 18 नवंबर 2023 को फरियादी अंकित सोनगरा अपनी पत्नी मनीषा, बच्ची हनीका और भाई लोकेश के साथ ई-रिक्शा क्रमांक एमपी 09 जेडवाय 3995 से भाई दूज मनाने ग्राम जलोदिया ज्ञान गौतमपुरा गया था। कार्यक्रम के बाद परिवार ई-रिक्शा से गौतमपुरा से हातोद की ओर लौट रहा था। ई-रिक्शा अंकित चैकसे चला रहा था।
बताया गया कि जैसे ही ई-रिक्शा सरकारी अस्पताल के सामने हातोद पहुंचा, तभी देपालपुर की ओर से आ रहे टवेरा वाहन क्रमांक एमपी 09 बीडी 2009 के चालक ने तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए सड़क किनारे चल रहे ई-रिक्शा को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ई-रिक्शा सड़क की साइड में पलट गया।
हादसे में लोकेश को बांयी आंख के ऊपर, बांये हाथ, बांये पैर के घुटने और कमर में चोटें आईं। मनीषा के बांये कंधे और हाथ सहित नाक, मुंह और माथे पर चोट लगी, जबकि बच्ची हनीका को भी शरीर में चोटें आईं। घायलों को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल हातोद ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर चोटों के कारण उन्हें एमवाय अस्पताल इंदौर रेफर किया गया, जहां उनका उपचार कराया गया।
फरियादी की मौखिक रिपोर्ट के आधार पर थाना हातोद में आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 263/2023 धारा 279, 337 और 338 भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया, घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और साक्षियों के बयान दर्ज किए। संपूर्ण विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाई।
