बिना वैध पंजीयन चिकित्सा संस्थान संचालित करने और अपात्र व्यक्तियों से उपचार कराने वालों पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश
दमोह, 28 अक्टूबर 2026। जिले में नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सा संस्थानों की जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिले में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों एवं पैथोलॉजी लैब की सघन जांच कराई जाएगी। इस दौरान संस्थानों के पंजीयन, संचालन की वैधता, चिकित्सकों की योग्यता, आवश्यक अनुमतियों तथा निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। जांच में अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नोटिस जारी करने से लेकर सीलिंग सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना तथा बिना आवश्यक पंजीयन या अनुमति के संचालित होने वाली चिकित्सा गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। निजी चिकित्सा संस्थानों में उपचार कराने वाले नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित संस्थान निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप सेवाएं प्रदान कर रहे हैं या नहीं।
बिना वैध पंजीयन संचालन करने वालों पर कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों और अन्य संबंधित चिकित्सा संस्थानों का नियमानुसार पंजीयन होना आवश्यक है। जिन संस्थानों के पास वैध पंजीयन अथवा संचालन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं है, उन्हें तत्काल अपना संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। बिना वैध पंजीयन या आवश्यक अनुमति के चिकित्सा संस्थान संचालित करना नियमों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में संबंधित संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, चिकित्सा कार्य करने वाले व्यक्तियों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता की भी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि उपचार करने वाले व्यक्ति निर्धारित चिकित्सकीय योग्यता रखते हैं या नहीं तथा वे नियमानुसार उपचार करने के लिए अधिकृत हैं या नहीं। बिना मान्य चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों से लेकर पैथोलॉजी लैब तक होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तावित जांच का दायरा केवल निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब को भी शामिल किया गया है। निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों के आवश्यक दस्तावेजों, पंजीयन एवं अनुमति की स्थिति तथा लागू नियमों के पालन का परीक्षण किया जाएगा।जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संस्थान निर्धारित शर्तों के अनुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं। दस्तावेजों में कमी, आवश्यक अनुमति के अभाव अथवा अन्य अनियमितताएं मिलने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध प्रचलित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी न हो और मरीजों को उपचार के दौरान अनावश्यक जोखिम का सामना नहीं करना पड़े।
सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिले के समस्त खंड चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को संबंधित संस्थानों की स्थिति का परीक्षण कर अनियमितताओं की पहचान करने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
निर्देशों के अनुसार, जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थान को नोटिस जारी किया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संचालन बंद कराने, संस्थान को सील करने तथा आवश्यकतानुसार पुलिस कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इस प्रक्रिया में नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का संकलन कर कार्रवाई की जाएगी।
जांच प्रतिवेदन निर्धारित समय-सीमा में देना होगा
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण के बाद जांच प्रतिवेदन निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का नियमानुसार निराकरण किया जाएगा। इससे अनियमितताओं से संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों और नियमों के उल्लंघन को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। संबंधित प्रकरणों में कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजन के स्वास्थ्य और उपचार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालकों से आवश्यक पंजीयन, अनुमतियां और निर्धारित मानक सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवाओं से जुड़े नियमों का पालन करना प्रत्येक संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से जिले में निजी चिकित्सा संस्थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी मजबूत करने और नियमों के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि संबंधित संस्थान आवश्यक पंजीयन और अनुमति के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं तथा निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान अनियमितता मिलने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
