इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का चरैवेति एकत्रीकरण संपन्न, पांच जिलों के स्वयंसेवक हुए शामिल

समाज की समस्याओं के समाधान के लिए सज्जन शक्ति के साथ मिलकर कार्य करने और पंच परिवर्तन को व्यवहार में उतारने पर दिया जोर
इंदौर, 28 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा कि समाज संगठन और परिवर्तन का कार्य कठिन होने के साथ ही श्रमसाध्य भी है। इस कार्य को वीरव्रत के संकल्प के साथ आगे बढ़ाते हुए विजय तक पहुंचाना है। समाज के सामने उपस्थित चुनौतियों और समस्याओं के समाधान के लिए समाज की सज्जन शक्ति के साथ मिलकर कार्य करने की शैली विकसित करनी होगी। समाज परिवर्तन का कार्य केवल संगठन के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसमें संपूर्ण समाज की सहभागिता आवश्यक है। जगन्नाथ का रथ तभी आगे बढ़ता है, जब उसे आगे बढ़ाने के लिए सबका हाथ लगता है।
इंदौर में बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंदौर विभाग का चरैवेति एकत्रीकरण आयोजित किया गया। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर आयोजित इस एकत्रीकरण में इंदौर विभाग के पांच जिलों से आए स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ की सौ वर्षों की यात्रा, संगठन विस्तार, व्यक्ति निर्माण, सामाजिक समरसता, सेवा कार्यों और समाज परिवर्तन के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा स्वयंसेवकों के अथक परिश्रम और समर्पण की विजय यात्रा है। इस अवधि में संघ ने व्यक्ति निर्माण की एक अनुपम शाखा पद्धति विकसित की है। शाखा के माध्यम से ऐसे स्वयंसेवकों की श्रृंखला तैयार हुई है, जिन्होंने अपना जीवन देश और समाज के लिए समर्पित किया। इसके साथ ही आदर्श सामाजिक जीवन जीने वाले व्रती परिवारों की भी एक लंबी श्रृंखला तैयार हुई है। संगठन का उद्देश्य केवल अपनी संरचना का विस्तार करना नहीं, बल्कि समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।
सौ वर्षों की यात्रा में व्यक्ति निर्माण और समाज जागरण पर जोर
अतुल लिमये ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन के विकास के साथ समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जागरण और परिवर्तन के लिए अनेक रचनाएं खड़ी की हैं। संघ का सेवा विभाग समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का कार्य करता है, जबकि प्रचार विभाग राष्ट्रीय विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न माध्यमों से कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विचारों को व्यापक समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से जागरण पत्रिकाओं और विश्व संवाद केंद्रों के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। देश के लगभग तीन लाख गांवों तक जागरण पत्रिकाओं और राष्ट्रीय विचारों को पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संपर्क विभाग समाज जीवन की सज्जन शक्ति को राष्ट्रीय कार्य से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। इसी प्रकार, समाज की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए छह विषयों पर आधारित गतिविधियों की रचना विकसित की गई है।उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों का मूल उद्देश्य समाज के भीतर सकारात्मक चेतना विकसित करना, राष्ट्रीय विचारों को व्यापक बनाना और लोगों को समाजहित के कार्यों से जोड़ना है। संगठन की वास्तविक सफलता तभी है, जब समाज के विभिन्न घटक राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए सकारात्मक भूमिका निभाएं।
संगठन विस्तार के साथ गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक
सह सरकार्यवाह ने स्वयंसेवकों से कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा और व्यापक संगठनात्मक विस्तार से संतुष्ट होकर रुकना नहीं है। कार्यकर्ताओं में निरंतर आगे बढ़ने और कार्य को अधिक प्रभावी बनाने की आकांक्षा बनी रहनी चाहिए। संगठन के विस्तार के साथ सर्व समाज में संघ भाव की व्याप्ति हो, यह संकल्प लेकर कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि संगठन की पहुंच समाज के प्रत्येक वर्ग तक होनी चाहिए। इसके साथ ही कार्य की गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। केवल संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वयंसेवकों का निर्माण, उनके आचरण में सकारात्मक परिवर्तन और समाज के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संगठनात्मक कार्यों के साथ समाज जीवन में परिवर्तन लाने वाली रचनाओं को भी समान रूप से विकसित करना होगा। समाज के भीतर राष्ट्रीय विचारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा, जिसमें लोग अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव अपनाएं।
पंच परिवर्तन को व्यवहार में उतारने का आह्वान
अतुल लिमये ने कहा कि समाज के आचरण में परिवर्तन लाने के लिए स्वयंसेवक पंच परिवर्तन का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं। यह संकल्प केवल विचारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव व्यक्ति, परिवार और समाज के व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज का मन देश और समाज के अनुकूल कार्य करने वाला बने। समाज में आस्था, आत्मीयता और परस्पर विश्वास की भावना मजबूत हो। इसके लिए विचार-विमर्श के क्षेत्र में कार्य करने वाली रचनाओं को विकसित करना आवश्यक है। समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार होने के साथ-साथ उन विचारों के अनुरूप आचरण में परिवर्तन भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने सामाजिक विषमता और भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज के किसी भी घटक के साथ विषमता का व्यवहार नहीं होना चाहिए। सामाजिक समरसता, परस्पर सम्मान और सकारात्मक आचरण के माध्यम से ही एक स्वस्थ एवं संगठित समाज का निर्माण संभव है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से अपेक्षा की कि वे पंच परिवर्तन के संकल्प को अपने व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक व्यवहार में उतारें तथा अपने संपर्क में आने वाले लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। समाज में परिवर्तन का प्रभाव तभी व्यापक होगा, जब विचार और व्यवहार के बीच सामंजस्य स्थापित होगा।
समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर चलना होगा
सह सरकार्यवाह ने कहा कि देश और समाज के सामने अनेक प्रकार की समस्याएं और चुनौतियां हैं। इनका समाधान करने के लिए शासन और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। केवल किसी एक संस्था या संगठन के प्रयासों से समाज की सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय संस्थाओं, संगठनों और व्यक्तियों के बीच संवाद तथा समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में देशभर में दस लाख से अधिक संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं के साथ संवाद स्थापित करना, उनके अनुभवों और क्षमताओं को समझना तथा समाजहित के कार्यों में उनका सहयोग प्राप्त करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं की कार्यक्षमता और कुशलता के अनुरूप उन्हें जिम्मेदारियां देने, आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और समन्वित कार्यशैली विकसित करने की जरूरत है। इससे समाज की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर सामूहिक प्रयास किए जा सकेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संपूर्ण समाज को साथ लेकर चलने का स्वभाव विकसित करना होगा। कार्यकर्ताओं को केवल संगठनात्मक दायरे तक सीमित रहने के बजाय समाज के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। समाज में पहले से सक्रिय लोगों और संस्थाओं के अनुभवों का लाभ लेकर सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सामाजिक परिवर्तन के लिए व्यवस्था और संस्कारों पर जोर
अतुल लिमये ने कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए केवल जागरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं का निर्माण भी जरूरी है, जो सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करें। भारतीय हिंदू जीवन मूल्यों और धर्म आधारित व्यवस्थाओं के अनुरूप समाजहितकारी व्यवस्थाओं को विकसित करने की दिशा में कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि समाज को संस्कार देने वाली व्यवस्थाएं मजबूत होनी चाहिए। व्यक्ति के विचारों के साथ उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आए, इसके लिए परिवार, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि संगठन की व्यापक पहुंच के साथ-साथ समाज में जागरण, संपर्क और समस्याओं के समाधान से जुड़ी गतिविधियों को मजबूत करना आवश्यक है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता और संवाद बढ़ाकर ही ऐसी परिस्थितियां निर्मित की जा सकती हैं, जिनमें सामाजिक समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से संभव हो।
कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने का संदेश
सह सरकार्यवाह ने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज संगठन और परिवर्तन का कार्य आसान नहीं है। इसके लिए निरंतर परिश्रम, धैर्य, समर्पण और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। कार्य के दौरान उपेक्षा, विरोध, उत्साहवर्धन और सहयोग, सभी प्रकार की परिस्थितियां सामने आती हैं। इन परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना अपने उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने वीरव्रत धारण किया है, इसलिए कार्य की कठिनाइयों को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए उसे प्रभावी और सफल बनाना होगा। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास करना, लोगों के साथ संवाद बढ़ाना और विभिन्न सामाजिक शक्तियों को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से अपेक्षा की कि वे संगठन के विस्तार के साथ अपने कार्य की गुणवत्ता, समाज के साथ आत्मीयता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण को भी निरंतर मजबूत करें। समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सकारात्मक विचारों और आचरण को बढ़ावा देना ही आगे की यात्रा का महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।
ध्वजारोहण, संघ प्रार्थना और सामूहिक योग प्रदर्शन से हुआ शुभारंभ
चरैवेति एकत्रीकरण का प्रारंभ ध्वजारोहण और संघ प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान इंदौर विभाग के कार्यवाह रित्नेश रघुवंशी ने शताब्दी वर्ष के दौरान इंदौर विभाग में आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।कार्यक्रम के मंच पर मालवा प्रांत के प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, इंदौर विभाग संघचालक डॉ. मुकेश मोढ तथा मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी प्रशांत शाह उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रशांत शाह ने राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशासन और देशभक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने तथा अनुशासन को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर विचार रखे।इंदौर विभाग के पांच जिलों से आए स्वयंसेवकों की सहभागिता वाला यह एकत्रीकरण संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संगठन की सौ वर्षों की यात्रा, व्यक्ति निर्माण और समाज परिवर्तन के प्रयासों के साथ भविष्य में सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए व्यापक जनसहभागिता विकसित करने का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
