( आचार्य नारायण वैष्णव)
इंदौर। राष्ट्र भावना, अनुशासन और संस्कारों से ओतप्रोत वातावरण में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिशु स्वयंसेवकों के प्रकट कार्यक्रम में संघ के मध्यक्षेत्र बौद्धिक प्रमुख श्री नागेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि राष्ट्र प्रथम का विचार ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल ध्येय है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक प्रत्येक कार्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर किया जाता रहा है और यही विचार बाल स्वयंसेवकों में बचपन से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। उन्होंने इंग्लैंड की रानी के राज्यारोहण पर बांटी जा रही मिठाई लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जिसने हमारे देशवासियों को पीड़ा दी, उसके राज्यारोहण की मिठाई खाना जहर के समान है। इस प्रसंग से स्पष्ट होता है कि उनके मन में राष्ट्रभक्ति बचपन से ही रची-बसी थी और यही संस्कार आगे चलकर संघ की स्थापना का आधार बने।
श्री वशिष्ठ ने कहा कि बाल्यावस्था में दिए गए संस्कार जीवनभर व्यक्ति के व्यक्तित्व को दिशा देते हैं। माता-पिता का सम्मान करना, गुरुजनों का आदर करना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना हर स्वयंसेवक का कर्तव्य है। उन्होंने उपस्थित शिशु स्वयंसेवकों को अवगुणों से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है, जबकि घृणा से ईर्ष्या उत्पन्न होती है और यह दोनों ही व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती हैं।उन्होंने बच्चों की संगति पर विशेष बल देते हुए कहा कि “बालों का संग बाजे मृदंग” — अर्थात जिस प्रकार मृदंग के साथ रहने से स्वर की मधुरता बढ़ती है, उसी प्रकार अच्छे साथ से बच्चों में श्रेष्ठ गुण विकसित होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को संस्कारित वातावरण दें और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ें।
कार्यक्रम संघ संस्थापक के जन्मदिवस के निमित्त आयोजित किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था, जबकि अंग्रेजी तिथि के अनुसार उनका जन्म 1 अप्रैल को आता है। संघ की पहली शाखा भी उन्होंने नन्हे बच्चों को साथ लेकर ही प्रारंभ की थी। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए शिशु स्वयंसेवकों का यह विशेष प्रकट कार्यक्रम उनके जन्मदिवस पर आयोजित किया गया।कार्यक्रम में अनुशासन, शारीरिक दक्षता और सामूहिकता का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला। शिशु स्वयंसेवकों ने दंड-प्रहार, योगासन, व्यायाम, गीत, घोष तथा बौद्धिक गतिविधियों का सामूहिक प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया। छोटे-छोटे स्वयंसेवकों की सुसंगठित पंक्तियां, एकसमान वेशभूषा और तालबद्ध प्रदर्शन ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया।
इस कार्यक्रम में 500 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। आयोजन की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। इंदौर विभाग की 36 नगर एवं खंड इकाइयों की 196 से अधिक शाखाओं पर नियमित अभ्यास कराया गया। इस अभ्यास में 1200 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया। निर्धारित अहर्ता पूर्ण करने के बाद इंदौर विभाग के 540 शिशु स्वयंसेवकों ने अंतिम प्रकट कार्यक्रम में सहभागिता कर सामूहिक प्रदर्शन प्रस्तुत किया।कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक, समाज के गणमान्य नागरिक एवं संघ पदाधिकारी उपस्थित रहे। उपस्थित जनों ने बाल स्वयंसेवकों के अनुशासन और प्रदर्शन की सराहना की तथा इस प्रकार के आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत के साथ समापन किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य बालकों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है, जिससे वे भविष्य में देश और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।
