बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में फिर संदिग्ध हालात में बाघ की मौत, जांच शुरू
उमरिया। जिले में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे क्षेत्र में एक बार फिर संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ का सड़ा-गला शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक आशंका करंट लगाकर शिकार किए जाने की जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।जानकारी के अनुसार वन विकास निगम की चंदिया रेंज से लगे ग्राम मझगंवा और चंदवार की सीमा के पास कक्ष क्रमांक पीएफ-111 से सटे राजस्व क्षेत्र में कई दिन पुराना बाघ का शव बरामद हुआ। शव पूरी तरह सड़ चुका था, जिससे आशंका जताई जा रही है कि घटना कुछ दिन पहले की है। क्षेत्र बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाहर होने के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि टाइगर रिजर्व की सीमा से बाहर निकलते ही बाघों की सुरक्षा कमजोर हो जाती है और शिकारियों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं। इससे पहले भी दिसंबर 2025 में चंदिया रेंज के कथली नदी क्षेत्र में करंट लगाकर बाघ के शिकार का मामला सामने आया था, जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे।वन विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलते ही टाइगर रिजर्व की टीम, डॉग स्क्वाड और पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया गया है। प्रथम दृष्टया करंट से मौत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल की जांच कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व से बाहर के बफर और राजस्व क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि बाघों की आवाजाही के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।फिलहाल वन विभाग ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण और संभावित शिकार की पुष्टि हो सकेगी।
