दमोह, 8 जुलाई। दमोह जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हाल ही में वनकर्मी पर हुए बाघ के हमले की जांच में वन विभाग को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। घटनास्थल पर लगाए गए कैमरा ट्रैप, बाघ के पदचिह्नों के वैज्ञानिक विश्लेषण और लगातार की गई गश्त के आधार पर विभाग ने उस बाघ शावक की पहचान कर ली है, जिस पर वनकर्मी पर हमला करने का संदेह है। साथ ही वन विभाग ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन अफवाहों का भी खंडन किया है, जिनमें वनकर्मी और ग्रामीण पर हुए हमलों के लिए एक ही बाघ को जिम्मेदार बताया जा रहा था।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मोहली परिक्षेत्र में वनकर्मी पर हमला करने वाला बाघ और कुछ दिन पहले पटना-मोहली गांव के एक ग्रामीण पर हमला करने वाला बाघ अलग-अलग हैं। दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रकार का संबंध नहीं पाया गया है।

गश्त के दौरान हुआ था हमला
वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि 5 जुलाई 2026 को मोहली परिक्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान वन विभाग का दल जंगल में बाघ की गतिविधियों की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान दो वनकर्मी अनजाने में एक बाघ के अत्यंत निकट पहुंच गए। अचानक हुई इस मुठभेड़ में बाघ ने हमला कर दिया।
हमले में वन विभाग के श्रमिक बाबूलाल रैकवार गंभीर रूप से घायल हो गए। बाघ के हमले से उनके पैरों में गहरी चोटें आईं। साथियों ने तत्काल उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जिसके बाद उनका उपचार कराया गया। घटना के बाद पूरे वन अमले को सतर्क कर क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू कर दी गई।
हाथियों के साथ चलाया गया सर्च ऑपरेशन
घटना के तुरंत बाद वन विभाग ने व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। हाथियों की सहायता से जंगल के अंदर कई किलोमीटर क्षेत्र में लगातार गश्त की गई। संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए गए और बाघ की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी गई।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल हमलावर बाघ की पहचान करना था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और वन कर्मचारियों की सुरक्षा बनी रहे।
कैमरा ट्रैप से हुई बाघ शावक की पहचान
वनमण्डलाधिकारी के अनुसार 7 जुलाई की सुबह गश्ती दल को घटनास्थल के समीप एक बाघ शावक दिखाई दिया। इसके बाद कैमरा ट्रैप में कैद तस्वीरों और पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
जांच में सामने आया कि यही शावक नवंबर 2025 में हुई अखिल भारतीय बाघ गणना के दौरान भी कैमरा ट्रैप में दर्ज हुआ था। उस समय उसकी अनुमानित आयु 9 से 12 माह थी, जबकि वर्तमान में उसकी आयु लगभग 15 से 18 माह आंकी गई है।
पदचिह्नों ने भी किया खुलासा
वन अधिकारियों ने बताया कि घटना वाले दिन वनकर्मी जिस बाघ के पदचिह्नों का पीछा कर रहे थे, उनका आकार सामान्य वयस्क बाघ की तुलना में छोटा था। कैमरा ट्रैप से मिले साक्ष्यों और पदचिह्नों के विश्लेषण के बाद यह संभावना मजबूत हुई कि वनकर्मी पर हमला इसी युवा बाघ शावक ने किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र के बाघ कई बार अपने क्षेत्र की सुरक्षा या अचानक निकट पहुंचने पर आत्मरक्षा की प्रतिक्रिया में हमला कर देते हैं।
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का किया खंडन
वन विभाग ने कहा कि घटना के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि पटना-मोहली गांव में ग्रामीण पर हमला करने वाला बाघ और वनकर्मी पर हमला करने वाला बाघ एक ही है।
वनमण्डलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कैमरा ट्रैप, बाघों की पहचान, पदचिह्नों और वर्ष 2025 की अखिल भारतीय बाघ गणना के रिकॉर्ड के विस्तृत मिलान के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि दोनों घटनाओं में शामिल बाघ अलग-अलग हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वन्यजीवों से संबंधित किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना को ही आधार बनाएं।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था
घटना के बाद मोहली परिक्षेत्र सहित आसपास के जंगलों में वन विभाग ने गश्त बढ़ा दी है। हाथियों के साथ नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है, कैमरा ट्रैप की संख्या बढ़ाई गई है और वन कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे जंगल के भीतर अनावश्यक रूप से प्रवेश न करें, अकेले जंगल में न जाएं और यदि किसी क्षेत्र में बाघ या अन्य वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती गतिविधियां वन्यजीव संरक्षण की सफलता का संकेत हैं, लेकिन इसके साथ ही मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं को रोकना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक निगरानी तकनीक, कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और स्थानीय लोगों की जागरूकता से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
वन विभाग ने कहा है कि पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और भविष्य में भी बाघों की गतिविधियों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन जारी रहेगा, ताकि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
