इंदौर, 18 सितंबर 2026राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष की यात्रा को समाज के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से इंदौर के सुदर्शन भवन स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति परिसर में तैयार की गई ‘संघ अनुभवशाला’ का लोकार्पण सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने किया। शुक्रवार शाम आयोजित कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद डॉ. मोहन भागवत ने अनुभवशाला में तैयार की गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर अनुभवशाला के निर्माण में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं और निर्माणकर्ताओं का सम्मान भी किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि ‘अनुभवशाला’ नाम अपने आप में इसकी सार्थकता को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन करना नहीं है। संघ की कार्यपद्धति और उसकी विशेषताओं को समझने के लिए प्रत्यक्ष अनुभव आवश्यक है और इसी दृष्टि से अनुभवशाला एक उपयोगी प्रयोग है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को बदलने की क्षमता संघ के कार्य में दिखाई देती है, लेकिन कुछ मूल बातें ऐसी हैं जो अपरिवर्तनीय हैं। इन दोनों पक्षों को समझने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं, बल्कि अनुभव भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ के किसी कार्यक्रम में कुछ दिन साथ रहकर उसकी कार्यपद्धति को समझा जा सकता है।
डॉ. भागवत ने कहा कि संघ को जानने-समझने की जिज्ञासा रखने वाले लोग कार्यालयों में आते हैं और वहां के वातावरण तथा कार्य को देखकर संघ की गतिविधियों को समझने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अनुभवशाला को ‘गागर में सागर’ के समान बताते हुए कहा कि यहां संघ के प्रत्यक्ष दर्शन का प्रयास किया गया है।

‘एक विचार, एक यात्रा—राष्ट्र प्रथम’ की अवधारणा पर आधारित
संघ अनुभवशाला की जानकारी देते हुए मोहित जैन ने बताया कि यह प्रदर्शनी ‘एक विचार, एक यात्रा—राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की यात्रा, विचार, कार्यपद्धति और समाज जीवन में किए गए कार्यों को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
अनुभवशाला में आगंतुकों के लिए तीन प्रमुख प्रश्नों को केंद्र में रखा गया है—संघ क्या है, इसकी स्थापना क्यों हुई और संघ किस प्रकार कार्य करता है। इन प्रश्नों के उत्तर विभिन्न प्रदर्शनों, चित्रों, आलेखों, वीडियो और तकनीकी माध्यमों के जरिए प्रस्तुत किए गए हैं।
प्रदर्शनी की शुरुआत भारत की प्राचीन सभ्यता और ज्ञान परंपरा से होती है और इसके माध्यम से संघ की स्थापना से लेकर शताब्दी यात्रा तक के विभिन्न पड़ावों को प्रस्तुत किया गया है। संघ की कार्यपद्धति, विस्तार और समाज जीवन में किए गए कार्यों को भी अलग-अलग माध्यमों से प्रदर्शित किया गया है।
पंच परिवर्तन के पांच आयाम भी प्रदर्शनी में शामिल
अनुभवशाला में संघ द्वारा बताए जाने वाले ‘पंच परिवर्तन’ के पांच आयामों—सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य—को दैनिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
आयोजकों के अनुसार अनुभवशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की संस्कृति और परंपरा से परिचित कराना, सेवा तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को समझाना और राष्ट्र प्रथम के विचार को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित करना है।
उच्च तकनीक और कलात्मक प्रस्तुति के माध्यम से तैयार की गई इस प्रदर्शनी में वीडियो गैलरी, चित्र, आलेख और अन्य दृश्य माध्यमों का उपयोग किया गया है। इनके माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, क्रमिक विस्तार और समाज कार्य को दर्शाने का प्रयास किया गया है।
27 सितंबर से आम नागरिकों के लिए खुलेगी प्रदर्शनी
आयोजकों ने बताया कि संघ अनुभवशाला 27 सितंबर से आम नागरिकों के लिए निशुल्क उपलब्ध रहेगी। प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक देखी जा सकेगी।
प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए संघ साहित्य तथा भारतीय संस्कृति से संबंधित सामग्री भी उपलब्ध रहेगी। समाजजनों की सुविधा के लिए अनुभवशाला से संबंधित वेबसाइट और सोशल मीडिया लिंक की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के उमेश वर्मा ने किया। आभार समिति के सचिव राकेश यादव ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के बाद उपस्थित नागरिकों और स्वयंसेवकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
लोकार्पण कार्यक्रम में मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, इंदौर विभाग संघचालक मुकेश मोढ, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के अध्यक्ष ईश्वर हिन्दुजा सहित संघ के अन्य पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
