दमोह, 28 मई 2026/जिले के जबेरा थाना क्षेत्र में 11 भैंसों और पड़वों की संदिग्ध मौत के मामले ने ग्रामीण अंचल में सनसनी फैला दी थी। पशुपालकों की आजीविका से जुड़े इस गंभीर मामले में जबेरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कंजई मानगढ़ निवासी द्वारका राय ने 27 मई 2026 को चौकी सिंग्रामपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि टेलनमार्ग घाटी क्षेत्र के पास उसकी तथा गांव के अन्य पशुपालकों शारदा राय, राजकुमार राय और इंद्रकुमार राय की कुल 11 भैंसों एवं पड़वों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मारकर फेंक दिया गया है। घटना सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया था। पशुपालकों के लिए भैंसें केवल पशु नहीं बल्कि उनकी आय और परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख साधन होती हैं, इसलिए इस घटना ने ग्रामीणों को गहराई से प्रभावित किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना जबेरा में अपराध क्रमांक 152/26 के तहत धारा 325 बीएनएस में प्रकरण दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की गई। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के ग्रामीणों, पशुपालकों तथा संभावित प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए, जिनके आधार पर संदेह की सुई कुछ व्यक्तियों की ओर गई।
थाना प्रभारी उप निरीक्षक विकास सिंह चौहान के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने लगातार पूछताछ और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई को अंजाम दिया। अनुसंधान के दौरान मिले तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पांच आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उन्होंने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।
गिरफ्तार आरोपियों में सुभाष पिता बद्री राय (41 वर्ष), परमलाल पिता गोपाल चौधरी (53 वर्ष), प्रवेंद्र पिता परमलाल चौधरी (19 वर्ष), आनंद उर्फ कालू पिता नोखेलाल राय (32 वर्ष) और अंशुल पिता रूपलाल राय (27 वर्ष) शामिल हैं। सभी आरोपी ग्राम पौड़ी मानगढ़ के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और असंतोष का माहौल बनने लगा था। ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा था और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। ऐसी स्थिति में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया बल्कि संभावित विवाद और शांति भंग होने की स्थिति को भी टाल दिया। इसी उद्देश्य से आरोपियों के विरुद्ध धारा 170 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में पशुधन किसानों और पशुपालकों की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। एक भैंस की कीमत लाखों रुपये तक हो सकती है और उसके माध्यम से परिवार की नियमित आय सुनिश्चित होती है। ऐसे में एक साथ 11 पशुओं की मौत ने प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं करती तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता था।
जबेरा पुलिस की इस कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। ग्रामीणों का मानना है कि अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी से लोगों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हुआ है। पुलिस प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जिले में कानून हाथ में लेने वालों और पशुधन को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक विकास सिंह चौहान, प्रधान आरक्षक देवेन्द्र रैकवार, प्रधान आरक्षक रणधीर सिंह, आरक्षक वीरेन्द्र सिंह, आरक्षक शैलेन्द्र सिंह तथा चालक आरक्षक प्रमोद बेन की विशेष भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और टीम की सक्रियता के कारण मामले का बेहद कम समय में खुलासा संभव हो सका।
