भोपाल। मध्य प्रदेश आजीविका मिशन में सामने आए करोड़ों के घोटाले पर अब सरकार का रुख पूरी तरह आक्रामक हो गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए सीधे मोर्चा संभाल लिया है। उनके सख्त हस्तक्षेप के बाद पूरे पंचायत विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल पर लगे गंभीर आरोपों की जांच लोकायुक्त संगठन द्वारा की जा रही है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि बेलवाल से जुड़ी अहम जानकारी और दस्तावेज संबंधित विभागों द्वारा लोकायुक्त को सौंपे ही नहीं गए। इस लापरवाही को मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बेहद गंभीरता से लिया है।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने बिना किसी देरी के सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी अधिकारी जांच में बाधा डाल रहे हैं या दस्तावेज छिपा रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। यह कदम न केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा संदेश है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है।
गौरतलब है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जब यह मामला उठा, तब सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि पंचायत विभाग ने ही ललित मोहन बेलवाल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद से ही मंत्री का रुख और अधिक सख्त हो गया।
हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक में भी पंचायत विभाग के अधिकारियों ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के बजाय केवल मौखिक जानकारी दी, जिससे संदेह और गहरा गया। अब मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के सख्त तेवर के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संदेश साफ है—अब न तो भ्रष्टाचार बचेगा और न ही उसे छिपाने वाले। मंत्री की इस निर्णायक और आक्रामक कार्रवाई को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।
