वर्ष 2025 में पूर्ण होने थे सांदीपनि विद्यालय, 2026 में भी निर्माण अधूरा; गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर सैंपल टेस्टिंग के निर्देश
दमोह। जिले में निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण कार्य में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी है। कलेक्टर के अनुसार विद्यालयों का निर्माण निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना था, लेकिन वर्ष 2025 की निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी वर्ष 2026 में निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सके हैं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि सांदीपनि विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए विद्यालय भवनों का निर्माण निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाना था, ताकि विद्यार्थियों को समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। निर्माण कार्य में हुई देरी के कारण विद्यालयों से मिलने वाली प्रस्तावित सुविधाओं का लाभ विद्यार्थियों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
समयसीमा के बाद भी अधूरा निर्माण
कलेक्टर ने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित समयसीमा महत्वपूर्ण होती है। संबंधित निर्माण एजेंसी को समय पर कार्य पूरा करना था, लेकिन निर्धारित अवधि में निर्माण पूर्ण नहीं हो सका। वर्ष 2025 में जिन सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण पूरा होना अपेक्षित था, वे वर्ष 2026 में भी निर्माणाधीन हैं। प्रशासन ने इसी देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार पर 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुरूप पूरा कराना भी बताया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के तहत बनने वाले भवनों का निर्माण समय पर पूरा होना आवश्यक है, क्योंकि इन परियोजनाओं का सीधा संबंध विद्यार्थियों और आमजन को मिलने वाली सुविधाओं से है।
गुणवत्ता को लेकर भी मिली शिकायतें
सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण में देरी के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें प्रशासन के सामने आने की बात कलेक्टर ने कही है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों को देखते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री और किए गए निर्माण की गुणवत्ता की जांच नियमानुसार कराई जाए। इसके लिए संबंधित स्थानों से सैंपल लेकर उन्हें परीक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के अनुसार जहां-जहां जांच के दौरान निर्धारित मापदंडों के विपरीत निर्माण अथवा अनियमितता की पुष्टि होगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन केवल निर्माण में हुई देरी के मामले तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता की भी तकनीकी जांच कराकर तथ्यात्मक स्थिति सामने लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सैंपल टेस्टिंग से सामने आएगी निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी परीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने निर्माण स्थलों से सैंपल लेकर उनकी टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए हैं।टेस्टिंग रिपोर्ट के आधार पर यह निर्धारित किया जा सकेगा कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य निर्धारित तकनीकी एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं। यदि परीक्षण में किसी प्रकार की कमी अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।प्रशासन द्वारा सैंपल टेस्टिंग के निर्देश दिए जाने के बाद अब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में आ गई है। इससे निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
बच्चों को समय पर मिलना था बेहतर शैक्षणिक वातावरण
सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में भवनों का समय पर निर्माण पूरा नहीं होने का सीधा असर विद्यालयों के संचालन और विद्यार्थियों को मिलने वाली प्रस्तावित सुविधाओं पर पड़ता है।प्रशासन की ओर से अब यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है कि निर्माण कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और जो कार्य किए जा रहे हैं, वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों। कलेक्टर की कार्रवाई को इसी जवाबदेही की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
जुर्माने की कार्रवाई से निर्माण एजेंसी में हलचल
ठेकेदार पर 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की कार्रवाई को जिला प्रशासन की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब विद्यालयों का निर्माण निर्धारित समयसीमा के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है और गुणवत्ता संबंधी शिकायतें भी सामने आई हैं।कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां जांच में अनियमितता की पुष्टि होगी, वहां संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति को लेकर प्रशासनिक निगरानी और बढ़ सकती है।
अब जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी निर्माण स्थलों से लिए जाने वाले सैंपल और उनकी टेस्टिंग रिपोर्ट होगी। परीक्षण के परिणाम सामने आने के बाद ही गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों की तकनीकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।इसी तरह निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के बाद भी लंबित रहने के मामले में लगाए गए जुर्माने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और विद्यार्थियों को इन विद्यालयों की सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा समयसीमा, निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर अपनाए गए रुख से संबंधित निर्माण एजेंसी और अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय करने का संदेश गया है। जिला प्रशासन का जोर अब निर्माण कार्यों को पूरा कराने के साथ-साथ गुणवत्ता की जांच और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो उसके अनुसार नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।
