दमोह। भगवान झूलेलाल की जयंती (चेटीचंड) और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर दमोह में सिंधी समाज की महिलाओं और युवतियों ने आस्था, उत्साह और संगठन की मिसाल पेश करते हुए एक भव्य वाहन रैली निकाली। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण को जीवंत किया, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण और एकता का प्रभावी संदेश भी दिया।
सिंधी कैंप से शुरू हुआ भक्ति का कारवां
रैली का शुभारंभ शहर के सिंधी कैंप क्षेत्र से हुआ, जहां सैकड़ों महिलाएं और युवतियां पारंपरिक सिंधी परिधानों में सजी-धजी अपने दोपहिया और चार पहिया वाहनों के साथ एकत्रित हुईं। जैसे ही यात्रा प्रारंभ हुई, ‘जय झूलेलाल’ और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। डीजे पर बजते भक्ति गीतों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
शहर के प्रमुख मार्गों पर दिखा उत्सव का माहौल
यह विशाल वाहन यात्रा सिंधी कैंप से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी।तीन गुल्ली और स्टेशन चौराहे पर स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर रैली का गर्मजोशी से स्वागत किया।राय चौराहा और घंटाघर जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में रैली के पहुंचते ही उत्सव जैसा वातावरण बन गया।
पुराना थाना और कीर्तिस्तंभ जैसे ऐतिहासिक स्थलों से गुजरते हुए यह यात्रा पुनः सिंधी कैंप पहुंचकर संपन्न हुई।रैली के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया, जिससे कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
नारी शक्ति और संस्कृति का सशक्त प्रदर्शन
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पूरी अगुवाई महिलाओं ने की। रैली में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी आस्था, एकता और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से वे अपनी समृद्ध सिंधी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।महिलाओं का कहना था, “यह यात्रा हमारे लिए श्रद्धा के साथ-साथ आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक है। भगवान झूलेलाल के आशीर्वाद से हम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और नारी शक्ति को आगे बढ़ाने का संकल्प लेती हैं।”
सामाजिक समरसता का संदेश
पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और सामूहिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। इस वाहन रैली ने यह साबित किया कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का संचार होता है।धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और महिला सशक्तिकरण के इस अनूठे संगम ने दमोह शहर को एक बार फिर उत्सव और भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
