किसानों से तुलाई के नाम पर नकद वसूली, सैंपल में गेहूं गायब, पर्चियां अटकीं; पिपरिया चम्पत केंद्र पर प्रशासन ने पकड़ी जमीनी लूट

दमोह, जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की सरकारी व्यवस्था के भीतर चल रहे ‘सिस्टमेटिक शोषण’ का बड़ा चेहरा गुरुवार को उजागर हो गया, जब कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बिना किसी पूर्व सूचना के पिपरिया चम्पत स्थित उपार्जन केंद्र पर संयुक्त दबिश दी। जो तस्वीर सामने आई उसने यह साफ कर दिया कि किसानों के नाम पर चल रही खरीदी प्रक्रिया कई जगह नियमों से नहीं, बल्कि ‘कट-कमिशन’ और ‘मैदानी सांठगांठ’ से संचालित हो रही थी।
केंद्र पर पहुंचे प्रशासनिक अमले ने जैसे ही किसानों को कर्मचारियों, पल्लेदारों और वेयरहाउस प्रबंधन से अलग कर बयान लेने शुरू किए, शिकायतों का अंबार लग गया। किसानों ने खुलकर बताया कि खरीदी केंद्र पर गेहूं तौलने के लिए उनसे खुलेआम नकद राशि ली जा रही है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि “बिना पैसा दिए तौल जल्दी नहीं होती” और “जो विरोध करे उसकी पर्ची लटका दी जाती है।”
तुलाई नहीं, किसानों की जेब तौली जा रही थी
सरकारी नियम कहते हैं कि किसान से तुलाई, पल्लेदारी या खरीदी प्रक्रिया में किसी प्रकार की राशि नहीं ली जाएगी। लेकिन पिपरिया चम्पत केंद्र पर वास्तविकता इससे उलट मिली। यहां तौल के पहले और बाद में अलग-अलग मदों के नाम पर किसानों से रुपए मांगे जा रहे थे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले कि यह वसूली व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि केंद्र के भीतर मौजूद कुछ लोगों की ‘मिलीभगत वाली व्यवस्था’ का हिस्सा थी।
यही नहीं, सैंपल जांच के नाम पर भी बड़ा खेल पकड़ा गया। प्रति ट्रॉली 3 से 5 किलो तक गेहूं अलग रखे जाने की शिकायत कई किसानों ने एक जैसी की। हैरानी की बात यह रही कि यह सैंपलिंग अधिकृत प्रक्रिया के तहत नहीं बल्कि अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा कराई जा रही थी। यानी किसान की उपज का हिस्सा नियम से नहीं, मनमर्जी से काटा जा रहा था।
वेयरहाउस, पल्लेदार और रिकॉर्ड—तीनों पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान तौल मशीन, बोरा वजन, पर्ची वितरण और कंप्यूटर एंट्री का मिलान कराया गया तो मामला और गंभीर नजर आया। किसानों को समय पर तौल पर्चियां नहीं मिल रही थीं। मौके पर कंप्यूटर रिकॉर्ड में पुरानी लंबित प्रविष्टियां देख कलेक्टर भड़क उठे। 24 अप्रैल की पर्चियां निरीक्षण के दिन तक प्रक्रिया में पाई गईं। इसका मतलब साफ था—या तो रिकॉर्ड जानबूझकर रोके जा रहे थे या फिर खरीदी की पूरी डिजिटल व्यवस्था सवालों के घेरे में थी।
सूत्र बताते हैं कि वेयरहाउस संचालक, पल्लेदार और केंद्र के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका को लेकर प्रशासन ने अलग से रिपोर्ट तलब की है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कम तौल, देरी से पर्ची और नकद वसूली—इन तीनों को एक ही चैन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि किसान मजबूरी में चुप रहे।
मौके पर कलेक्टर का गुस्सा, एफआईआर के सीधे निर्देश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि खरीदी केंद्र किसान सुविधा के लिए बनाए गए हैं, वसूली अड्डे के लिए नहीं। उन्होंने एसडीएम पथरिया को तत्काल संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए। समिति प्रबंधक की भूमिका पर भी नाराजगी जताई गई और विभागीय कार्रवाई की बात कही गई।
कलेक्टर ने कहा कि किसान की फसल में एक-एक दाना उसकी मेहनत का है, ऐसे में तौल में हेरफेर, सैंपल के नाम पर कटौती या अवैध वसूली सीधे किसान के हक पर हमला है। प्रशासन इसे सामान्य लापरवाही नहीं मानेगा।
एसपी ने भी दिए संकेत—अब सिर्फ नोटिस नहीं, केस होगा
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने निरीक्षण के दौरान पुलिस टीम को निर्देश दिए कि यदि किसानों के बयान और दस्तावेजी तथ्य मेल खाते हैं तो मामले को सिर्फ विभागीय अनियमितता न माना जाए, बल्कि आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्रवाई की जाए। इसका सीधा संदेश यह है कि खरीदी केंद्रों पर वर्षों से ‘चलन’ के नाम पर जो वसूली होती रही, उस पर अब आपराधिक शिकंजा कस सकता है।
मानक तौल पर भी प्रशासन की सख्ती
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि बोरे के वजन को लेकर भी भ्रम और मनमानी थी। कलेक्टर ने मौके पर साफ कराया कि जूट बारदाना 580 ग्राम और प्लास्टिक बारदाना 150 ग्राम मानकर ही वजन समायोजित होगा। जूट बोरे में 50.600 किलो तथा प्लास्टिक बोरे में 50.150 किलो से अधिक भार स्वीकार्य नहीं होगा। इससे ज्यादा या कम की स्थिति किसान के नुकसान का कारण बनेगी।
क्या यह सिर्फ एक केंद्र की कहानी है?
सबसे बड़ा सवाल यही है। पिपरिया चम्पत केंद्र पर जो सामने आया, उसने जिले के बाकी उपार्जन केंद्रों को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। क्योंकि किसानों की शिकायतें केवल एक दिन की नाराजगी नहीं बल्कि लंबे समय से बनी व्यवस्था की ओर इशारा कर रही थीं। यदि एक केंद्र पर तुलाई, पर्ची, सैंपल और नकद वसूली सब एक साथ मिलते हैं, तो यह मानना मुश्किल है कि समस्या सिर्फ एक स्थल तक सीमित है।
प्रशासन ने भले अभी एक केंद्र पर कार्रवाई शुरू की हो, लेकिन इस निरीक्षण ने जिले की पूरी समर्थन मूल्य खरीदी प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
किसानों के बीच चर्चा—“आज अधिकारी आए तो सच बाहर आया”
निरीक्षण के बाद किसानों में राहत के साथ यह चर्चा भी रही कि यदि अधिकारी इसी तरह बिना सूचना के अलग-अलग केंद्रों पर पहुंचें तो और भी कई परतें खुल सकती हैं। कई किसानों ने मौके पर कहा कि अब तक शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती थी, लेकिन आज पहली बार अधिकारियों ने जमीन पर खड़े होकर पूरी बात सुनी।
