दमोह: करोड़ों की पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित परिवार ने कलेक्टर को सौंपे सबूत
दमोह। जिले के ग्राम हिरदेपुर निवासी एक परिवार ने कथित भू-माफिया द्वारा उनकी खानदानी जमीन हड़पने के प्रयास का गंभीर आरोप लगाते हुए बुधवार 01 अप्रैल को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत के साथ दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। पीड़ितों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए करोड़ों रुपये कीमत की जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, साथ ही विरोध करने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है।
फर्जी रजिस्ट्री और रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप
आवेदक अखिलेश रजक एवं रामरानी (निवासी ग्राम हिरदेपुर) ने बताया कि ग्राम लाइनबाग स्थित उनकी पुश्तैनी भूमि, खसरा क्रमांक 122/1, 123, 187 सहित अन्य पर वर्षों से उनका कब्जा है। आरोप है कि न्यू शांतिनगर निवासी जगजीत सिंह उर्फ बिल्लू वाधवा ने कथित रूप से फर्जी बैनामा और संशोधन पंजियों के माध्यम से राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया।पीड़ितों के अनुसार जब उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय में जांच की तो संबंधित खसरा नंबरों से जुड़ी कोई वैध रजिस्ट्री उपलब्ध नहीं मिली। इसके बावजूद रिकॉर्ड में नामांतरण होना राजस्व व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आवेदकों ने इसमें अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
01 अप्रैल को कलेक्टर को सौंपे दस्तावेज
पीड़ित परिवार ने बुधवार 01 अप्रैल को कलेक्टर के समक्ष रजिस्ट्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी, राजस्व अभिलेखों की प्रतियां, गिरवी रखी जमीन से संबंधित दस्तावेज तथा अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए। उनका कहना है कि जिन खसरा नंबरों के आधार पर नामांतरण किया गया है, उनसे संबंधित कोई वैध रजिस्ट्री रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
बैंक में गिरवी जमीन के नामांतरण पर उठे सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि के कुछ खसरा नंबर (83, 88, 113, 115 आदि) पहले से बैंक और सेवा सहकारी समिति में गिरवी रखे हुए हैं। ऐसे में नियमों के अनुसार उस जमीन का विक्रय या नामांतरण संभव नहीं था, इसके बावजूद कथित रूप से नामांतरण कर लिया जाना गंभीर अनियमितता बताया गया है।
धमकी और कार्रवाई न होने की शिकायत
पीड़ितों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें लगातार धमकाया जा रहा है कि जमीन नहीं छोड़ी तो उन्हें 8-10 वर्षों के लिए जेल भिजवा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में पूर्व में जनसुनवाई और एसडीओ कार्यालय में भी आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगें
- खसरा नंबरों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
- राजस्व रिकॉर्ड में हुए कथित फर्जी नामांतरण निरस्त किए जाएं
- धमकी देने और फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है। उनका दावा है कि विवादित जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में है, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
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Dr. LN Vaishnav
Editor
लेखक वरिष्ठ पत्रकार है। विगत 30 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। दैनिक समाचार पत्रों के अलावा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार समाचारों का प्रकाशन होता है।
