दमोह, 14 अप्रैल/डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच दमोह पुलिस ने सक्रियता और तत्परता का परिचय देते हुए ठगी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की है। साइबर सेल दमोह द्वारा वर्ष 2026 में अब तक की गई कार्रवाई में न केवल बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण किया गया है, बल्कि लाखों रुपये की ठगी राशि को समय रहते होल्ड कर पीड़ितों को राहत भी दिलाई गई है।पुलिस अधीक्षक दमोह श्री श्रुतकीर्ति सोमवंशी (भा.पु.से.) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुजीत सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों के तहत साइबर सेल प्रभारी श्रीमती नेहा गोस्वामी एवं उनकी टीम लगातार सक्रिय रहकर शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही कर रही है।
NCRP पर 256 शिकायतें, 17 लाख रुपये की राशि बचाई
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कुल 256 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर सेल दमोह ने लगभग 17,00,000 रुपये (सत्रह लाख रुपये) की ठगी गई राशि को वित्तीय लेनदेन के दौरान ही होल्ड कराने में सफलता प्राप्त की है।
यह उपलब्धि न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सही समय पर की गई कार्रवाई से साइबर ठगी के मामलों में बड़ा नुकसान टाला जा सकता है।
“गोल्डन ऑवर” में शिकायत दर्ज कराने पर जोर
दमोह पुलिस द्वारा साइबर अपराधों से निपटने के लिए “गोल्डन ऑवर” रणनीति को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार जिले के सभी थानों में समय-समय पर साइबर अपराधों से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इन प्रशिक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति की शिकायत तुरंत—यानी घटना के शुरुआती घंटों (गोल्डन ऑवर) के भीतर—NCRP पोर्टल पर दर्ज कर ली जाए। ऐसा करने से संबंधित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रकम को रोका जा सकता है और पीड़ित को राहत दिलाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
साइबर सेल की कार्यप्रणाली बनी उदाहरण
साइबर सेल प्रभारी श्रीमती नेहा गोस्वामी के नेतृत्व में टीम लगातार तकनीकी दक्षता और सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक, पेमेंट गेटवे और अन्य वित्तीय संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर तुरंत ट्रांजैक्शन को ट्रैक और होल्ड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।इस तेज कार्रवाई के कारण कई मामलों में पीड़ितों की रकम वापस मिलने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों में वृद्धि का एक बड़ा कारण जागरूकता की कमी भी है। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, ओटीपी शेयरिंग, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड जैसे मामलों में लोग अक्सर झांसे में आ जाते हैं।इसी को ध्यान में रखते हुए दमोह पुलिस द्वारा आमजन को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की सलाह दी जा रही है।
आम नागरिकों से अपील
दमोह पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—
- किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें
- किसी के साथ ओटीपी, बैंक डिटेल या पासवर्ड साझा न करें
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं
- नजदीकी थाने में तुरंत संपर्क करें
पुलिस की सक्रियता से बढ़ा भरोसा
दमोह पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से आम नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत हुआ है। साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्ती और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने की दिशा में यह पहल एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रही है।
