दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ग्राम बरबासा निवासी लोकेन्द्र अहिरवार, जो सेरेब्रल बीमारी से ग्रसित हैं, पिछले आठ माह से दिव्यांगता पेंशन से वंचित थे। केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण न होने के कारण उनकी पेंशन बंद हो गई थी, जिससे उनका जीवन-यापन प्रभावित हो रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण यह पेंशन ही उनके लिए मुख्य सहारा थी, लेकिन लंबे समय तक भुगतान बंद रहने से उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
मामले की जानकारी सामने आने पर आवेदक ने जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में अपनी समस्या रखी। जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर कोचर ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से लोकेन्द्र अहिरवार को 9,600 रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इस सहायता से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत मिली।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर दिव्यांगता पेंशन को तत्काल प्रारंभ किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की नियमित समीक्षा करने तथा तकनीकी कारणों से किसी भी पात्र हितग्राही का भुगतान लंबित न रखने के निर्देश भी दिए।
सेरेब्रल बीमारी क्या है और क्या होती हैं समस्याएं
चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को प्रायः Cerebral Palsy कहा जाता है। यह मस्तिष्क से जुड़ी स्थिति है, जिसमें शरीर की गतिविधियों और मांसपेशियों के नियंत्रण पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे मरीजों को चलने-फिरने, संतुलन बनाने, हाथ-पैरों के समन्वय और बोलने में कठिनाई हो सकती है।
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मांसपेशियों में जकड़न या कमजोरी, हाथ-पैरों का अनियंत्रित हिलना, बैठने-उठने में परेशानी, बोलने में कठिनाई, निगलने में दिक्कत और कई मामलों में दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भरता शामिल है। ऐसे मरीजों को नियमित देखभाल, फिजियोथेरेपी, दवाइयों और सहायक उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।
सरकार की योजनाएं और मिलने वाले लाभ
दिव्यांगजनों के लिए सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा के तहत दिव्यांग पेंशन योजना संचालित की जाती है, जिसमें पात्र हितग्राहियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा दिव्यांग प्रमाण पत्र, आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपचार, सहायक उपकरण वितरण, परिवहन में छूट, छात्रवृत्ति तथा पुनर्वास सेवाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मरीजों को नियमित चिकित्सा परामर्श, फिजियोथेरेपी और पोषण की आवश्यकता होती है। समय पर सहायता और योजनाओं का लाभ मिलने से मरीज की स्थिति में सुधार के साथ परिवार को भी राहत मिलती है।
यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था में केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं के कारण आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को भी उजागर करता है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों को समय पर सहायता प्रदान करना है, लेकिन छोटी प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटियों के चलते यदि महीनों तक पेंशन बंद रहे तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है।
जनसुनवाई में हुई त्वरित कार्रवाई यह संदेश देती है कि पात्र हितग्राहियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय पर निराकरण आवश्यक है। साथ ही संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिव्यांग, वृद्ध एवं निराश्रित हितग्राहियों की पेंशन में अनावश्यक विलंब न हो और केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
इस पहल से जहां एक ओर पीड़ित परिवार को राहत मिली, वहीं यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता से जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई जा सकती है।
