रिपोर्टर: आचार्य नारायण वैष्णव
इंदौर / जिले में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय में एनसीओआरडी (NCORD) की जिला स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल, एसपी ग्रामीण श्रीमती यांगचेन भूटिया, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी, अपर आयुक्त आकाश सिंह, स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर रोशन राय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिले में नशा मुक्ति अभियान को व्यापक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया जाएगा। इसके लिए आबकारी विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संयुक्त अभियान चलाकर नशा तस्करों पर सख्ती की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल छिटपुट कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि निरंतर निगरानी, जनभागीदारी और जागरूकता को साथ लेकर अभियान चलाना होगा।
युवाओं को नशे से बचाने के लिए जिले के सभी कॉलेजों में “नशा मुक्ति समितियों” के गठन का निर्णय लिया गया। इन समितियों में छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक और प्रशासनिक प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। समितियां कॉलेज परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगी, नशे के दुष्परिणामों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगी तथा प्रभावित छात्रों को परामर्श देकर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगी। यदि कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में नशीले पदार्थों की बिक्री या आपूर्ति करने का प्रयास करता है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन और पुलिस को दी जाएगी, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके।
कलेक्टर ने कहा कि शिक्षण संस्थान युवाओं के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं और यहां किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जनभागीदारी को अभियान की सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा। इससे युवाओं को सही दिशा मिलेगी और वे नशे की गिरफ्त में आने से बच सकेंगे।
बैठक में ड्रग माफिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उन रासायनिक पदार्थों की निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, जिनका उपयोग नशीले पदार्थ तैयार करने में किया जाता है। कलेक्टर श्री वर्मा ने निर्देश दिए कि ऐसे कंपाउंड्स की आपूर्ति, भंडारण और उपयोग पर कड़ी नजर रखी जाए। साथ ही आवश्यक कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें एनडीपीएस एक्ट के दायरे में लाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। जिन रसायनों का नियमन पहले से है, उनके साथ अन्य संभावित कंपाउंड्स की पहचान कर सूची तैयार की जाएगी और उनके उपयोग को नियंत्रित करने के उपाय किए जाएंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नशा मुक्ति अभियान को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि स्कूल-कॉलेजों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों को जोड़कर इसे व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। जागरूकता रैलियां, कार्यशालाएं, परामर्श सत्र और विशेष अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाएगा।
कलेक्टर श्री वर्मा ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सामूहिक प्रयास से ही जीती जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ड्रग तस्करी, अवैध बिक्री और नशे के नेटवर्क पर सतत कार्रवाई करते हुए अभियान को परिणाममूलक बनाया जाए।
यह बैठक स्पष्ट संदेश देती है कि जिला प्रशासन नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रहा है। कार्रवाई, जागरूकता और जनभागीदारी के माध्यम से नशा मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यदि यह अभियान प्रभावी रूप से लागू होता है, तो युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और सुरक्षित भविष्य देने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
