अर्धनग्न होकर दंड भरते पहुंचे भक्त, पहाड़ी रास्ते की कठिनाई भी बनी भक्ति का माध्यम
दमोह। आज 27 मार्च, शुक्रवार चैत्र नवरात्रि की नवमीं पर दमोह जिले के तेजगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम दसोन्दी स्थित प्राचीन खेर माता मंदिर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चिलचिलाती धूप और तपती दोपहर के बावजूद हजारों श्रद्धालु पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचे। माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ दर्शन किए।नवरात्रि के दौरान ग्राम दसोन्दी में पारंपरिक रूप से जवारे स्थापित कर नौ दिनों तक विधि-विधान से माता भगवती की पूजा-अर्चना की जाती है। पंडा द्वारा नियमों का पालन करते हुए प्रतिदिन आराधना की जाती है, वहीं श्रद्धालु भी व्रत, संयम और श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल होते हैं। नवमीं के दिन जवारों का विसर्जन कर मां से आशीर्वाद मांगने की परंपरा निभाई जाती है। इसी क्रम में शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचे और भक्ति भाव से हाजिरी लगाई।
यहां की विशेष परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु अर्धनग्न होकर लगभग एक किलोमीटर दूर से दंड भरते हुए मंदिर तक पहुंचे। तपती जमीन, कंकरीले रास्ते और पहाड़ी चढ़ाई की कठिनाई के बावजूद भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर दंड के साथ “जय माता दी” के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों के चेहरे पर थकान की जगह आस्था और विश्वास की चमक दिखाई देती रही।
पहाड़ी पर स्थित इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचने के मार्ग में छाया या विश्राम की विशेष व्यवस्था नहीं है, फिर भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा सभी माता के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। कई श्रद्धालु नंगे पैर तपती जमीन पर चलते हुए मंदिर तक पहुंचे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भीषण गर्मी भी भक्तों की आस्था के आगे फीकी पड़ गई हो।नवमीं के अवसर पर जवारों की शोभायात्रा भी निकाली गई। भक्तों ने सिर पर जवारे रखकर माता के जयकारों के साथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से विसर्जन किया। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक गीतों के बीच पूरा क्षेत्र भक्ति में डूबा नजर आया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, वहीं युवाओं ने जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
स्थानीय मान्यता है कि दसोन्दी खेर माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते तेजगढ़ सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु मनौती पूर्ण होने पर दंड भरते हैं और माता का आभार व्यक्त करते हैं।श्रद्धालुओं का कहना है कि माता की कृपा से उन्हें धूप और कठिनाई का अहसास नहीं होता। “माता का बुलावा आता है तो रास्ता अपने आप आसान हो जाता है,” एक श्रद्धालु ने भावुक होकर बताया।नवरात्रि की नवमीं पर ग्राम दसोन्दी खेर माता मंदिर में उमड़ी यह आस्था यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा के आगे गर्मी, दूरी और कठिनाई भी छोटी पड़ जाती है। श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण ने एक बार फिर इस प्राचीन आस्था स्थल की महत्ता को उजागर कर दिया।
