महू के जघन्य एवं चिन्हित प्रकरण में न्यायालय का फैसला, 13 साक्षियों के बयान और अभियोजन के तर्कों के आधार पर सुनाई सजा
इंदौर। टीवी सुधारने में हुई देरी को लेकर हुए विवाद में इलेक्ट्रॉनिक दुकान संचालक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने पूर्व आर्मी जवान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रीति श्रीवास्तव, डॉ. आंबेडकर नगर महू, इंदौर की अदालत ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए आरोपी जयदीप सिंह परिहार पिता तिलक राज, उम्र 48 वर्ष, निवासी लक्ष्मी विहार कॉलोनी महू, इंदौर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
उपनिदेशक अभियोजन आशीष कुमार खरे ने बताया कि थाना महू के अपराध क्रमांक 429/2022 से संबंधित इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेंद्र सिंह मुजाल्दे ने पैरवी की। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे जघन्य एवं चिन्हित प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था। इसकी प्रतिमाह समीक्षा उपनिदेशक अभियोजन द्वारा की गई तथा अभियोजन पक्ष ने मामले के प्रत्येक पहलू को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से कुल 13 साक्षियों के बयान कराए गए। अभियोजन के तर्कों एवं प्रस्तुत साक्ष्यों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
टीवी सुधारने में देरी को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार घटना 12 सितंबर 2022 की है। फरियादी विकास अग्रवाल ने थाना महू में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि श्याम विलास चौराहे पर उसकी मोबाइल की दुकान है, जबकि उसके बड़े भाई नीलेश अग्रवाल की गोकुलगंज महू में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है। घटना वाले दिन वह अपने भाई की दुकान पर मौजूद था। इसी दौरान दोपहर लगभग 3:45 बजे एक व्यक्ति ग्रे रंग की एक्टिवा से दुकान पर पहुंचा और टीवी सुधारने में दो महीने से अधिक समय लगने को लेकर नीलेश अग्रवाल से विवाद करने लगा।नीलेश अग्रवाल ने बताया कि तबीयत खराब होने के कारण दुकान बंद थी, जिस वजह से टीवी समय पर ठीक नहीं हो पाई। इसी बात पर आरोपी ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपी ने स्वयं को जयदीप सिंह परिहार बताते हुए आर्मी से सेवानिवृत्त होना बताया और अपनी रिवॉल्वर निकाल ली।
रिवॉल्वर से किए चार से पांच फायर, उपचार के दौरान हुई मृत्यु
अभियोजन के मुताबिक आरोपी ने नीलेश अग्रवाल को जान से मारने की नीयत से रिवॉल्वर से लगातार चार से पांच गोलियां चलाईं। इनमें से एक गोली नीलेश की बाईं आंख के पास और दूसरी गोली सीने में लगी, जबकि अन्य गोलियां जमीन पर लगीं। गोली चलाने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना के समय विकास अग्रवाल और उनकी मां उषा अग्रवाल भी वहां मौजूद थीं। गोली चलने से भयभीत होकर दोनों इधर-उधर छिप गए थे।घायल नीलेश अग्रवाल को उपचार के लिए मेवाड़ा अस्पताल, किशनगंज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना की सूचना पर थाना महू में आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 429/2022, धारा 302 भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
विवेचना के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया गया चालान
पुलिस द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण कर मौका नक्शा तैयार किया गया। मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया तथा प्रत्यक्षदर्शियों सहित अन्य साक्षियों के कथन दर्ज किए गए। विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए। संपूर्ण विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 साक्षियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी जयदीप सिंह परिहार को हत्या का दोषी पाया और आजीवन कारावास के साथ पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।इस प्रकार टीवी सुधारने में हुई देरी को लेकर शुरू हुआ विवाद एक व्यक्ति की जान जाने का कारण बना। लगभग चार वर्ष पुराने इस हत्याकांड में न्यायालय के निर्णय के साथ आरोपी को कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
