लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, चुनावी पारदर्शिता, राष्ट्रीय एकता और देश की स्थिरता को लेकर भाजपा ने रखा अपना पक्ष, प्रबुद्धजनों से जनमानस तक संवाद पहुंचाने का आह्वान
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने, सरकार बनाने और सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप जनता के अधिकारों, संविधान की सर्वोच्चता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, न्याय और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता में निहित है। लोकतंत्र में सत्ता जनता के प्रति जवाबदेह होती है और कानून से ऊपर कोई नहीं होता। राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर यदि समाज में भ्रम, अविश्वास और अस्थिरता की परिस्थितियां निर्मित होने लगें तो इस पर गंभीर वैचारिक विमर्श आवश्यक हो जाता है। इसी व्यापक विचार को लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशभर में प्रबुद्ध वर्ग के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित करने का अभियान चलाया जा रहा है। लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय के माध्यम से भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रिया और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा की इस पहल के केंद्र में यह सवाल भी है कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती के लिए राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक समाज की क्या जिम्मेदारियां होनी चाहिए? क्या चुनावी पराजय के बाद संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाना उचित राजनीतिक आचरण है? क्या राजनीतिक विरोध को राष्ट्र की स्थिरता और सामाजिक सौहार्द प्रभावित करने का माध्यम बनाया जाना चाहिए? इन विषयों पर पार्टी प्रबुद्धजनों के बीच संवाद के माध्यम से अपना पक्ष रख रही है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सहित विपक्ष के कुछ दल चुनावी मुद्दों को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं पार्टी ने देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित करने वाली कथित गतिविधियों और भारत विरोधी ताकतों के संभावित प्रभावों को लेकर भी सतर्क रहने की आवश्यकता बताई है।
इसी अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय स्थित एक निजी होटल में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की। संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, लोकतांत्रिक परंपराओं, चुनावी प्रक्रिया, विपक्ष की भूमिका और राष्ट्र की आंतरिक स्थिरता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दमोह विधायक जयंत मलैया, भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे, शिक्षाविद डॉ. एन.आर. राठौर, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पी.एल. शर्मा, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष पं. विद्यासागर पांडे, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पांडे, भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय सेन, कार्यक्रम संयोजक मनीष सोनी एवं महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष वर्षा रैकवार ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। उपस्थित अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया गया। आयोजन के दौरान शिक्षाविद डॉ. एन.आर. राठौर, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पी.एल. शर्मा एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव पांडे का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
मनीष सोनी ने बताई संगोष्ठी की आवश्यकता और उद्देश्य
कार्यक्रम के संयोजक मनीष सोनी ने संगोष्ठी के आयोजन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को समझने के लिए केवल राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि संविधान, नागरिक अधिकारों, राष्ट्रीय दायित्वों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को भी समझना आवश्यक है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का दायित्व है कि वह अपने अनुभव और विचारों के माध्यम से आम नागरिकों को जागरूक करे।
उन्होंने आयोजन की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में अनेक राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अलग-अलग प्रकार की बातें सामने आती हैं। ऐसे में आवश्यक है कि समाज के जागरूक नागरिक तथ्यों को समझें, उनका विश्लेषण करें और बिना किसी भ्रम के अपनी राय बनाएं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद की परंपरा मजबूत रहनी चाहिए और राष्ट्रहित के विषयों पर समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
विधायक जयंत मलैया ने कांग्रेस की राजनीति और विपक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए दमोह विधायक जयंत कुमार मलैया ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विपक्ष का दायित्व सरकार की नीतियों की समीक्षा करना, कमियों को सामने लाना और जनहित के मुद्दों को उठाना है, लेकिन विपक्ष की राजनीति केवल आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब-जब चुनावों में पराजय का सामना करती है, तब-तब चुनावी प्रक्रिया और विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने एसआईआर अर्थात विशेष गहन पुनरीक्षण के विषय को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की आधारभूत आवश्यकता है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियां हैं तो उन्हें दूर करने की प्रक्रिया का स्वागत किया जाना चाहिए, न कि उसके संबंध में आम मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति निर्मित की जानी चाहिए।
विधायक मलैया ने महंगाई, आर्थिक परिस्थितियों और देश की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की राजनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित के विषयों पर जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। दीपावली के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों द्वारा प्रदर्शन की प्रस्तावित योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक सोच और रणनीति से जोड़कर देखा।
उन्होंने देश की आजादी से लेकर वर्तमान समय तक की राजनीतिक घटनाओं और आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल की नीतियों और निर्णयों पर सवाल उठाए। उन्होंने उपस्थित प्रबुद्धजनों के सामने विभिन्न ऐतिहासिक प्रसंग रखते हुए कहा कि देश की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए केवल वर्तमान घटनाओं को नहीं, बल्कि अतीत के निर्णयों और उनके प्रभावों को भी देखना जरूरी है।
श्याम शिवहरे ने एसआईआर, ईवीएम और वोट चोरी के आरोपों पर रखा भाजपा का पक्ष
भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस द्वारा कभी एसआईआर, कभी ईवीएम, कभी वोट चोरी और कभी चौकीदार चोर है जैसे नारों के माध्यम से लगातार राजनीतिक मुद्दे खड़े किए जाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के बयानों से चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों के मन में संदेह पैदा करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव परिणामों को स्वीकार करना, चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों को निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से उठाना तथा संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना महत्वपूर्ण है। किसी भी राजनीतिक दल को यदि चुनावी प्रक्रिया में कोई अनियमितता दिखाई देती है तो उसके समाधान के लिए उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का उपयोग करना चाहिए।
जिला अध्यक्ष ने राजनीतिक दलों की फंडिंग, आर्थिक सहयोग और इसके पीछे सक्रिय विभिन्न संगठनों एवं व्यक्तियों की भूमिका के विषय को भी अपने संबोधन में उठाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों में आर्थिक संसाधनों की पारदर्शिता और उनके स्रोतों की जानकारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश और विदेश से जुड़े संभावित प्रभावों तथा भारत विरोधी ताकतों की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
उन्होंने उपस्थित प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि वे अपने सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों के बीच वास्तविक तथ्यों को रखें। समाज में किसी भी विषय को लेकर भ्रम की स्थिति बने तो उसका समाधान तथ्यात्मक जानकारी और सकारात्मक संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रबुद्ध वर्ग की बात समाज में गंभीरता से सुनी जाती है, इसलिए उनकी भूमिका केवल विचार रखने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज को जागरूक करने में भी उनकी सहभागिता होनी चाहिए।
संजय सेन ने लोकतांत्रिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता पर रखे विचार
भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय सेन ने भी संगोष्ठी को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों को समझना चाहिए। उन्होंने प्रबुद्ध वर्ग से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
अमर सिंह राजपूत बोले- चुनौतियों को पहचानना और उनके प्रति सजग रहना जरूरी
कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे इंजीनियर अमर सिंह राजपूत ने अपने संबोधन में अराजकता शब्द के अर्थ और उसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अराजकता केवल सड़कों पर दिखाई देने वाली अव्यवस्था नहीं है, बल्कि जब समाज में नियमों, अनुशासन और स्थापित व्यवस्थाओं के प्रति सम्मान कमजोर होने लगता है, तब भी अराजक परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने कहा कि देश की चुनौतियों को केवल बाहरी परिस्थितियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कई बार सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के भीतर भी ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिनका प्रभाव राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर पड़ सकता है। इसलिए समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक को अपने दायित्वों को समझते हुए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए वैचारिक स्पष्टता, संगठनात्मक एकजुटता और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।
प्रबुद्ध वर्ग से आमजन तक संवाद पहुंचाने का आह्वान
संगोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र की मजबूती केवल राजनीतिक दलों या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आम नागरिक, शिक्षाविद, चिकित्सक, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रबुद्ध वर्ग समाज को दिशा देने और विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इसलिए लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्थाओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
विचार-विमर्श के दौरान यह विषय भी सामने आया कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन राजनीतिक मतभेदों को हिंसा, वैमनस्य अथवा सामाजिक विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए। किसी भी आरोप या दावे की जांच तथ्यों और उपलब्ध संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर होनी चाहिए। राष्ट्रीय हित और लोकतांत्रिक मर्यादाएं सभी राजनीतिक दलों एवं नागरिकों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम के अंत में अनुपम जड़िया ने उपस्थित अतिथियों, प्रबुद्धजनों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार दमोह में आयोजित लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ संगोष्ठी भाजपा की ओर से प्रबुद्ध वर्ग के बीच अपने वैचारिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को पहुंचाने का एक प्रयास रही। कार्यक्रम में कांग्रेस और विपक्ष की राजनीति, चुनावी प्रक्रिया, एसआईआर, ईवीएम, मतदाता सूची, राजनीतिक फंडिंग तथा राष्ट्रीय स्थिरता से जुड़े विषयों पर भाजपा नेताओं ने अपने विचार रखे। संगोष्ठी का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों को जागरूक रहना होगा, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना होगा और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर तथ्यों के आधार पर विचार करना होगा।
