इंदौर की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत का फैसला, 3000 रुपये अर्थदंड भी लगाया
इंदौर/घर के सामने खाली जगह पर कचरा फेंकने को लेकर हुए विवाद में मारपीट करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। दिनांक 11 मार्च 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को एक वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि माननीय न्यायालय श्रीमती विधि डागलिया, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला इंदौर (मध्यप्रदेश) ने थाना बाणगंगा के प्रकरण क्रमांक 4320778/2014 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी भैय्यालाल उर्फ रमेश पिता कन्हैयालाल सोलंकी (उम्र 53 वर्ष), निवासी इंदौर को भारतीय दंड संहिता की धारा 325 के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 323 के तहत छह माह का सश्रम कारावास और कुल 3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन की ओर से मामले में पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी प्रीति यादव द्वारा की गई।अभियोजन के अनुसार घटना के दिन फरियादी अपने घर का कचरा फेंकने के लिए पास की खाली सरकारी जमीन पर गया था, जिसके सामने आरोपी रमेश का घर स्थित है। कचरा फेंककर जब वह वापस अपने घर आ गया तो कुछ देर बाद आरोपी रमेश और उसकी पत्नी गजरीबाई उसके घर पहुंच गए और कचरा फेंकने को लेकर विवाद करने लगे।
बताया गया कि आरोपी रमेश ने फरियादी के साथ अभद्र भाषा में गाली-गलौज की। जब फरियादी ने गाली देने से मना किया तो आरोपी रमेश और उसकी पत्नी ने लकड़ी से उसकी पिटाई कर दी। इस हमले में फरियादी के सिर पर गंभीर चोट आई और खून निकलने लगा। इसी दौरान फरियादी की पत्नी सुंदरबाई उसे बचाने आई तो आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट की, जिससे उसके दाहिने कंधे पर चोट आई।घटना के बाद फरियादी की शिकायत पर थाना बाणगंगा में अपराध क्रमांक 617/2014 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 294 और 506 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।चिकित्सीय परीक्षण (एमएलसी) में फरियादी को फ्रैक्चर की पुष्टि होने पर मामले में धारा 325 भी जोड़ी गई। इसके बाद पूरी विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी रमेश को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।हालांकि इस प्रकरण में सह-आरोपी गजरीबाई को न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
