मुक्तिधाम तक नहीं बना पाए जिम्मेदार, टीन की आड़ में करनी पड़ी अंतिम विदाई; विधायक, जनप्रतिनिधि और नगर प्रशासन से जनता के सीधे सवाल—आखिर वर्षों की मांग पर कार्रवाई कब?
पथरिया। पथरिया नगर के वार्ड नंबर 14 से सामने आई एक तस्वीर ने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बीच एक वृद्ध का अंतिम संस्कार कराने के लिए परिजनों और स्थानीय लोगों को टीन की अस्थायी आड़ का सहारा लेना पड़ा। जिस समय एक परिवार अपने बुजुर्ग को अंतिम विदाई दे रहा था, उस समय मौसम से बचने तक की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।

यह सिर्फ बारिश में हुए एक अंतिम संस्कार की तस्वीर नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है, जहां वर्षों से एक बुनियादी सुविधा की मांग किए जाने के बावजूद स्थायी मुक्तिधाम का इंतजाम नहीं हो सका। सवाल यह है कि आखिर इस समस्या की जिम्मेदारी किसकी है?वार्डवासियों के अनुसार, स्थायी मुक्तिधाम की मांग लंबे समय से की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला पूर्व में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंच चुका है और तत्कालीन कलेक्टर के स्तर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके बावजूद यदि आज भी बारिश में अंतिम संस्कार के लिए टीन लगाना पड़ रहा है, तो फिर उन निर्देशों का क्या हुआ?
विधायक और जनप्रतिनिधियों से जनता के सीधे सवाल
क्षेत्रीय विधायक से सवाल है कि वार्ड नंबर 14 की यह समस्या आखिर उनकी जानकारी में है या नहीं?अगर जानकारी में है, तो अब तक स्थायी मुक्तिधाम क्यों नहीं बन पाया?क्या इस समस्या को विधानसभा और शासन के सामने उठाया गया?क्या इसके लिए नगर निकाय या शासन से बजट की मांग की गई?यदि बजट उपलब्ध है तो काम जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?और यदि बजट उपलब्ध नहीं है तो उसके लिए प्रयास कब किए जाएंगे?जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी दी है, उनसे अब सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है कि क्या किसी परिवार को बारिश में अंतिम संस्कार के लिए मजबूर होना ही इस समस्या की गंभीरता समझाने के लिए काफी नहीं है?
नगर प्रशासन से भी जवाब चाहिए
नगर प्रशासन से भी सवाल है कि वार्ड नंबर 14 में स्थायी मुक्तिधाम की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो सकी?क्या इस समस्या का कोई प्रस्ताव तैयार हुआ?यदि प्रस्ताव बना तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?भूमि उपलब्ध है या नहीं?यदि भूमि उपलब्ध नहीं है तो वैकल्पिक स्थान की तलाश क्यों नहीं की गई?और यदि भूमि व बजट दोनों की व्यवस्था हो चुकी है तो निर्माण कार्य कब शुरू होगा?जनता को अब आश्वासन नहीं, इन सवालों के स्पष्ट जवाब चाहिए।
शासन के विकास दावों के बीच यह तस्वीर क्यों?
सरकार लगातार शहरों और गांवों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की बात करती है। लेकिन पथरिया के वार्ड नंबर 14 की यह स्थिति सवाल करती है कि विकास की प्राथमिकताओं में आखिर आम नागरिक की अंतिम विदाई के लिए एक सम्मानजनक स्थान कहां है?सड़क, नाली, बिजली और अन्य विकास कार्य अपनी जगह हैं, लेकिन मुक्तिधाम जैसी मूलभूत आवश्यकता को वर्षों तक लंबित रखना निश्चित रूप से जवाबदेही का विषय है।
क्या विकास की परिभाषा में मुक्तिधाम जैसी बुनियादी सुविधा शामिल नहीं है?
क्या किसी परिवार को अपने मृत परिजन की अंतिम विदाई बारिश में खुले आसमान के नीचे करनी पड़े, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटेगी?
वोट के समय जनता याद, समस्या के समय कौन जिम्मेदार?
जनता का सबसे बड़ा सवाल जनप्रतिनिधियों से है। चुनाव के समय घर-घर पहुंचकर विकास के वादे किए जाते हैं। जनता भी उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधि चुनती है। लेकिन चुनाव के बाद जब उसी जनता को एक बुनियादी सुविधा के लिए वर्षों इंतजार करना पड़े, तो जवाबदेही तय कौन करेगा?वार्ड नंबर 14 के रहवासियों का कहना है कि उन्हें कोई बड़ी परियोजना नहीं चाहिए। उनकी मांग केवल इतनी है कि एक ऐसा स्थायी मुक्तिधाम हो, जहां किसी परिवार को अपने परिजन की अंतिम विदाई देते समय बारिश, धूप या मौसम की मार न झेलनी पड़े।
अब बयान नहीं, तारीख चाहिए
तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन सवाल यह है कि यह चर्चा भी कुछ दिनों बाद खत्म हो जाएगी या इस बार जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जमीन पर काम शुरू कराएंगे?
वार्डवासियों को अब आश्वासन नहीं चाहिए।
उन्हें यह जानना है कि स्थायी मुक्तिधाम के लिए प्रस्ताव कब बनेगा?
बजट कब स्वीकृत होगा?
निर्माण कब शुरू होगा?
और सबसे बड़ा सवाल—वार्ड नंबर 14 को स्थायी मुक्तिधाम की सुविधा आखिर किस तारीख को मिलेगी?
बारिश में टीन की आड़ में हुआ यह अंतिम संस्कार पथरिया के विकास मॉडल पर एक ऐसा सवाल छोड़ गया है, जिसका जवाब अब क्षेत्रीय विधायक, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर प्रशासन—तीनों को देना होगा।
