पलासिया चौराहे पर इंदौर पुलिस का अनोखा जागरूकता अभियान, हेलमेट-सीट बेल्ट और स्टॉप लाइन के नियमों का दिया संदेश
(आचार्य नारायण वैष्णव)
इंदौर। यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इंदौर पुलिस ने इस बार ऐसा अनोखा तरीका अपनाया, जिसने पलासिया चौराहे से गुजरने वाले हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सामान्य वर्दी में पुलिसकर्मियों के बीच अचानक गोरिल्ला की पोशाक पहने एक व्यक्ति सड़क पर उतरा और यातायात व्यवस्था संभालते हुए वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा का संदेश देने लगा।
गोरिल्ला को चौराहे पर यातायात नियंत्रित करते देख पहले तो राहगीर और वाहन चालक हैरान हुए, लेकिन कुछ ही देर में लोगों को अभियान का उद्देश्य समझ आने लगा। गोरिल्ला के इशारों के साथ वाहन चालक स्टॉप लाइन के पीछे रुकते नजर आए। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और कार चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
बुजुर्गों और पैदल यात्रियों के लिए भी बना मददगार
अभियान केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहा। गोरिल्ला की पोशाक पहने व्यक्ति ने सड़क पार करने वाले बुजुर्गों और पैदल यात्रियों की मदद भी की। यातायात पुलिस के साथ मिलकर उसने लोगों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने और चौराहे पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया।
अभियान के दौरान यातायात पुलिस के अधिकारी तथा एनसीसी कैडेट्स भी मौजूद रहे। पुलिस ने मनोरंजन और आकर्षण के इस तरीके के जरिए लोगों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया।
‘मैं तो जानवर हूं, फिर भी मुझे ट्रैफिक सेंस है’
इस अभियान का सबसे चर्चित संदेश रहा—“मैं तो जानवर हूं, फिर भी मुझे ट्रैफिक सेंस है। तुम तो इंसान हो।”
इसके माध्यम से लोगों को समझाया गया कि यातायात नियमों की अनदेखी महज चालान तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि थोड़ी सी लापरवाही किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपाय दुर्घटना की स्थिति में जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान
पलासिया चौराहे पर गोरिल्ला के यातायात संभालने का यह अनोखा अंदाज राहगीरों के मोबाइल कैमरों में भी कैद हुआ। अभियान के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रहे हैं।
इंदौर पुलिस का यह प्रयोग इस बात का संदेश देता नजर आया कि यातायात नियमों को केवल डर या जुर्माने के माध्यम से नहीं, बल्कि रोचक और रचनात्मक तरीके से भी लोगों की आदत का हिस्सा बनाया जा सकता है। अब देखना यह है कि चौराहे पर कुछ देर का यह अनोखा संदेश वाहन चालकों की रोजमर्रा की यातायात आदतों में कितना बदलाव ला पाता है।
