नई दिल्ली/मध्यप्रदेश/ चर्चित “कुंभ गर्ल” मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच के बाद बड़ा खुलासा सामने आया है। आयोग की जांच में जिस युवती को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, उसे पारधी जनजाति समुदाय की नाबालिग लड़की पाया गया है। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्यप्रदेश तक दस्तावेजों की जांच कर यह तथ्य सामने रखा।

17 मार्च को आयोग में उठाया गया मामला
इस संवेदनशील मामले को अधिवक्ता प्रथम दुबे ने 17 मार्च 2026 को आयोग के समक्ष उठाया था। आयोग के सलाहकार एवं पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में शिकायत में विवाह से जुड़े दस्तावेजों, आयु प्रमाण और अन्य पहलुओं की जांच की मांग की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि युवती की उम्र को लेकर प्रस्तुत दस्तावेज संदिग्ध हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
केरल से मध्यप्रदेश तक जांच
आयोग की जांच टीम ने केरल में विवाह से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। बताया गया कि मंदिर प्रशासन ने विवाह आधार कार्ड में दर्ज आयु के आधार पर कराया था और पंचायत स्तर पर पंजीकरण भी किया गया था। जांच में सामने आया कि विवाह में उपयोग किया गया जन्म प्रमाण पत्र संदिग्ध था।इसके बाद टीम ने मध्यप्रदेश के महेश्वर क्षेत्र में सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की। अस्पताल के जन्म रिकॉर्ड के अनुसार युवती का जन्म 30 दिसंबर 2009 को दर्ज पाया गया। इस आधार पर 11 मार्च 2026 को हुए विवाह के समय उसकी आयु लगभग 16 वर्ष 2 माह बताई गई, जिससे वह कानूनी रूप से नाबालिग सिद्ध हुई।
गलत जन्म प्रमाण पत्र निरस्त करने के निर्देश
जांच में यह भी सामने आया कि स्थानीय स्तर पर जारी जन्म प्रमाण पत्र में अलग जन्मतिथि दर्ज थी। आयोग की टीम ने दस्तावेजों की जांच के बाद गलत जन्म प्रमाण पत्र निरस्त कराने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए। साथ ही पीड़िता के परिजनों द्वारा प्रस्तुत जाति संबंधी दस्तावेजों से यह भी पुष्टि हुई कि वह अनुसूचित जनजाति पारधी समुदाय से संबंधित है।
FIR दर्ज, आरोपी पर गंभीर धाराएं
आयोग की अनुशंसा के बाद मध्यप्रदेश के महेश्वर थाना में आरोपी फरमान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें
- पॉक्सो एक्ट के तहत मामला
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम
- भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं
शामिल की गई हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश और केरल के पुलिस महानिदेशकों को नई दिल्ली मुख्यालय में तलब किया है। साथ ही दोनों राज्यों से प्रकरण की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से मांगी गई है।
संवेदनशील मामला, निगरानी जारी
आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग के विवाह और उससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कराई जाएगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आयोग ने कहा कि मामले में दस्तावेजों की सत्यता, विवाह प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच जारी है तथा अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
