आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् के तहत संचालित केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की क्लिनिकल प्रयोगशाला को जैव रसायन और रुधिरविज्ञान दोनों क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 15189:2022 की मान्यता प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि के साथ यह केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद का पहला संस्थान बन गया है जिसे यह प्रतिष्ठित मान्यता मिली है।
यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि प्रयोगशाला वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सटीक, विश्वसनीय और सुरक्षित नैदानिक परिणाम प्रदान कर रही है। इससे आयुष आधारित उपचार प्रणाली में वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी तथा रोगियों को उच्च गुणवत्ता वाली जांच सेवाएं उपलब्ध होंगी।
आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ISO 15189:2022 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मान्यता प्राप्त होने से रोगियों को विश्वसनीय और सटीक निदान सेवाएं मिलती हैं। इससे बेहतर उपचार और स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित होते हैं तथा आयुष क्षेत्र की विश्वसनीयता मजबूत होती है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि सीएआरआई बेंगलुरु का यह कदम पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली और आधुनिक उच्च गुणवत्ता निदान को एकीकृत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इससे प्रमाण-आधारित अभ्यास, अनुसंधान और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलेगी।
सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रबीनारायण आचार्य ने बताया कि संस्थान को मिली एनएबीएल मान्यता पूर्व में प्राप्त एनएबीएच और अन्य गुणवत्ता प्रमाणनों के साथ मिलकर आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार को उच्च स्तर पर स्थापित करेगी। वहीं संस्थान प्रमुख डॉ. सुलोचना भट ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह उच्च गुणवत्ता वाली रोगी-केंद्रित सेवाएं देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संस्थान की प्रयोगशाला को वर्तमान में जैव रसायन और रुधिरविज्ञान के अंतर्गत 50 परीक्षण मापदंडों के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। इनमें रक्त शर्करा, HbA1c, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, थायरॉइड प्रोफाइल, इलेक्ट्रोलाइट्स और संपूर्ण रक्त गणना जैसी महत्वपूर्ण जांच शामिल हैं। इन परीक्षणों से चयापचय, हार्मोन और रक्त संबंधी बीमारियों का सटीक आकलन संभव होता है।
वर्ष 2025-26 के दौरान प्रयोगशाला ने 1.52 लाख से अधिक जांचें कीं और 9,300 से ज्यादा मरीजों को सेवाएं प्रदान कीं। डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से मरीजों को एसएमएस, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए त्वरित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है।
संस्थान की सेवाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या वर्ष 2021 में 18,918 से बढ़कर वर्ष 2026 में 51 हजार से अधिक हो गई है। इसी अवधि में प्रयोगशाला जांचें 2,770 से बढ़कर 1.55 लाख से अधिक हो गईं। पंचकर्म और पैरा-सर्जिकल प्रक्रियाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि हर वर्ष 20 से 25 अनुसंधान परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
संस्थान ने औषधीय पौधों के प्रमाणीकरण, अनुसंधान और इनपेशेंट सेवाओं में भी विस्तार किया है। जुलाई 2024 से शुरू इनपेशेंट सेवाओं में बेड की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे एकीकृत आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की लोकप्रियता स्पष्ट होती है।
आयुष मंत्रालय के उत्कृष्टता केंद्र कार्यक्रम के अंतर्गत प्रयोगशाला को आधुनिक स्वचालित उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। नवंबर 2022 में प्रारंभिक एनएबीएल प्रमाणन मिलने के बाद संस्थान ने उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए ISO 15189:2022 मान्यता हासिल की।
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि आयुर्वेद और आयुष आधारित उपचारों को वैज्ञानिक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भविष्य में संस्थान परीक्षणों की संख्या बढ़ाने और निदान क्षमताओं का विस्तार करने की योजना बना रहा है ताकि जनता को अधिक व्यापक, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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