10:20 बजे औचक निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल, 12 नियमित और 9 संविदा कर्मचारियों के तीन दिन का वेतन काटने के निर्देश
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह, 20 अगस्त 2026/जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के औचक निरीक्षण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिला मुख्यालय स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में सुबह करीब 10:20 बजे अचानक पहुंचे कलेक्टर को कार्यालय में कई अधिकारी-कर्मचारियों की कुर्सियां खाली मिलीं। इसके बाद जब उपस्थिति रजिस्टर और कर्मचारियों की मौके पर मौजूदगी की जांच की गई तो अनुपस्थित कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
प्रारंभिक जांच में चार कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इसके बाद अलग-अलग शाखाओं और कर्मचारियों की उपस्थिति की पड़ताल की गई, जिसमें संख्या 16 तक पहुंची और विस्तृत जांच के बाद कुल 21 अधिकारी-कर्मचारियों के अनुपस्थित पाए जाने की जानकारी सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए 12 नियमित कर्मचारियों तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े 9 संविदा कर्मचारियों के तीन दिवस का वेतन काटने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
यह कार्रवाई केवल कर्मचारियों की गैरहाजिरी तक सीमित नहीं रही। निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल के दवा स्टोर में भी ऐसी कमियां सामने आईं, जिनसे दवाओं के रखरखाव, स्टॉक प्रबंधन और मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
21 कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर वेतन कटौती
कलेक्टर के औचक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए नियमित कर्मचारियों में श्रीमती महिमा जैन, औषधि निरीक्षक; श्रीमती माधवी बुधोलिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी; श्रीमती रजनी मिश्रा, सहायक ग्रेड-3; शेख इरफान खान, सहायक ग्रेड-3; राजीव कुमार सोनी, सहायक ग्रेड-3; हेमंत अहिरवार, सहायक ग्रेड-3; सुधांशु सोनी, सहायक ग्रेड-3; नरेंद्र पाल, सहायक ग्रेड-3; अभय तिवारी, सहायक मीडिया अधिकारी; शकील खान, भृत्य; इमरान खान, वाहन चालक तथा अंतराम रजक, वार्ड बॉय शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत अनुपस्थित मिले संविदा कर्मचारियों में शैलेन्द्र श्रीवास्तव, संविदा लेखा प्रबंधक; ऋषि कुमार अहिरवार, संविदा जिला कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर; बलराम राठौर, संविदा एचएमएंडई; विवेक कुमार विश्वकर्मा, संविदा उपयंत्री; रमाकांत उमरे, संविदा फार्मासिस्ट; नरेश अहिरवार, संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर; रामेश्वर कुर्मी, संविदा आरबीएसके चिकित्सक; श्रीमती आकांक्षा भारद्वाज, संविदा एपिडेमियोलॉजिस्ट तथा पुष्पेंद्र सिंह लोधी, आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं।
इन सभी के संबंध में तीन दिवस का वेतन काटने की कार्रवाई की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को शासकीय कार्यालयों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने की दिशा में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
दवा स्टोर पहुंचते ही सामने आई दूसरी बड़ी तस्वीर
सीएमएचओ कार्यालय का निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर दवा स्टोर रूम पहुंचे। यहां दवाओं के भंडारण और स्टॉक व्यवस्था की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी डेट की दवाइयां मिलने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा निर्धारित तापमान पर रखी जाने वाली दवाओं के लिए लगाए गए छह फ्रिज बंद पाए गए।दवाओं के सुरक्षित भंडारण में तापमान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में सभी छह फ्रिज का बंद मिलना स्वास्थ्य विभाग की स्टोरेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। निरीक्षण के दौरान स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कराया गया, जिसमें आठ मदों में से छह में अंतर पाए जाने की जानकारी सामने आई।दवा स्टोर की जिम्मेदारी संभाल रहे दो कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए और उन्हें वर्तमान जिम्मेदारी से विरत करने के निर्देश दिए गए।
स्टॉक में अंतर से लेकर एक्सपायरी दवाओं तक, कई सवाल
दवा स्टोर में मिली कमियों ने यह सवाल भी खड़ा किया कि जब सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं का स्टॉक उपलब्ध कराया जाता है तो उसके रखरखाव और वितरण की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। एक्सपायरी दवाओं को समय रहते अलग करने, उपयोग योग्य दवाओं का नियमित मिलान करने और तापमान नियंत्रित दवाओं की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने में लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने गंभीरता दिखाई।कलेक्टर ने दवा स्टोर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने तथा स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए। साथ ही एक्सपायरी दवाओं को उपयोग योग्य दवाओं से अलग रखने और दवाओं की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया।
2025 के 16 और 2026 के 39 इंडेंट अभी तक लंबित
निरीक्षण के दौरान दवा वितरण व्यवस्था से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मामला सामने आया। विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं और अस्पतालों द्वारा दवाओं की मांग के लिए भेजे गए कई इंडेंट लंबे समय से लंबित पाए गए।उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 के 16 इंडेंट तथा जनवरी 2026 से 39 इंडेंट लंबित पाए गए। यानी दवाओं की मांग किए जाने के बावजूद उन्हें संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।इस पर कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि संबंधित दवा स्टोर में उपलब्ध है तो इंडेंट प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर संबंधित अस्पताल या स्वास्थ्य संस्था को दवा जारी की जाए। यदि कोई दवा स्टॉक में उपलब्ध नहीं है तो उसकी मांग तत्काल संबंधित एजेंसी को भेजी जाए, ताकि मरीजों को दवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
मरीजों को बाजार से दवा खरीदने की जरूरत क्यों पड़े?
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निरीक्षण के दौरान दवा वितरण व्यवस्था को मरीज-केंद्रित बनाने पर विशेष जोर दिया। उनका स्पष्ट निर्देश रहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही दवाओं का लाभ मरीजों को समय पर मिलना चाहिए।सरकारी अस्पताल में दवा उपलब्ध होने के बावजूद यदि मरीज को वही दवा बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है तो यह केवल मरीज पर आर्थिक बोझ नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है।कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दवा उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट रखी जाए और मरीजों को अनावश्यक रूप से बाजार से दवा खरीदने की स्थिति में नहीं आना चाहिए।
ई-औषधि पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान ई-औषधि पोर्टल की व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पोर्टल के माध्यम से दवाओं की लाइव डिमांड, उपलब्ध स्टॉक और ऑनलाइन इश्यू की जानकारी को नियमित रूप से अपडेट रखा जाए।उन्होंने कहा कि दवा की मांग, उपलब्धता और वितरण के बीच किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित करें और लंबित मांगों की लगातार समीक्षा करें।
छह फ्रिज बंद मिलने पर उठे सवाल
दवा स्टोर में छह फ्रिज का बंद मिलना निरीक्षण का प्रमुख बिंदु रहा। जिन दवाओं को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना जरूरी है, उनके लिए कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था का सुचारु रहना आवश्यक है। ऐसे में सभी फ्रिज बंद पाए जाने की स्थिति ने दवाओं की गुणवत्ता और भंडारण प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए।कलेक्टर ने तापमान व्यवस्था को दुरुस्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जिन दवाओं के लिए नियंत्रित तापमान आवश्यक है, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप ही रखा जाए।
सीएमएचओ और सिविल सर्जन सहित अधिकारी रहे मौजूद
औचक निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. राकेश राय, सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल डॉ रीता चटर्जी तथा डिप्टी कलेक्टर संजय दुबे सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं में सुधार और जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय कार्यालयों में समय पर उपस्थिति केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि आम जनता को मिलने वाली सेवाओं से सीधे जुड़ा विषय है। स्वास्थ्य विभाग में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां आमजन सीधे उपचार, दवा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर रहता है।
औचक निरीक्षण ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
कलेक्टर के एक ही दिन के औचक निरीक्षण में सीएमएचओ कार्यालय की अनुपस्थिति से लेकर जिला अस्पताल के दवा स्टोर की व्यवस्थाओं तक कई कमियां सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।एक ओर 21 अधिकारी-कर्मचारियों पर तीन दिन के वेतन कटौती की कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर दवा स्टोर में एक्सपायरी दवाएं, बंद फ्रिज और स्टॉक में अंतर जैसी कमियां सामने आईं। इसके अलावा पुराने इंडेंट लंबित पाए जाने से दवा वितरण की गति पर भी सवाल उठे हैं।
अब महत्वपूर्ण यह होगा कि इन कमियों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और लंबित इंडेंट, स्टॉक में अंतर, एक्सपायरी दवाओं तथा बंद फ्रिज के मामले में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।कलेक्टर के औचक निरीक्षण ने फिलहाल स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कार्यालयों में समय पर उपस्थिति से लेकर मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने तक प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और मरीजों को समय पर सुविधा मिलना प्रशासन की प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकती है।
