दमोह को ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट‘ बनाने का लक्ष्य: कलेक्टर, एसपी, न्यायालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में हेलमेट होगा अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने दिए सख्त निर्देश

दमोह, 24 जुलाई 2026/मध्य प्रदेश का दमोह जिला सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बने, इसी उद्देश्य के साथ शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने की। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और जिले को “जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट” बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण एवं सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (वरिष्ठ खंड) उषाकांता कृषाण, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे, अपर कलेक्टर राकेश मोहन त्रिपाठी सहित सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
“देश में एक ऐसा जिला बनकर दिखाइए जहां सड़क दुर्घटना में एक भी मौत न हो”
बैठक में न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि भारत में 758 जिले हैं, लेकिन अब तक उन्हें ऐसा कोई जिला नहीं मिला जिसने “जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट” बनने की चुनौती स्वीकार की हो। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन, पुलिस और समाज मिलकर गंभीरता से काम करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक नागरिक यातायात नियमों का पालन करने लगे तो सरकार को अलग से अभियान चलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
कलेक्टर, एसपी, जिला न्यायालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में हेलमेट होगा अनिवार्य
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय हेलमेट को लेकर सामने आया। न्यायमूर्ति सप्रे ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला न्यायालय तथा जिले के सभी सरकारी विभागों में आने वाले कर्मचारियों के लिए हेलमेट पहनकर आना अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना हेलमेट के कार्यालय आता है तो उसकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जाए। इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए ताकि सरकारी कर्मचारी स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें और आम जनता भी प्रेरित हो।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों से शुरुआत होगी तो पूरे जिले में हेलमेट पहनने की संस्कृति विकसित होगी।
स्कूल-कॉलेजों में भी हेलमेट अभियान चलाने के निर्देश
न्यायमूर्ति सप्रे ने निर्देश दिए कि जिले के सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हेलमेट के उपयोग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। विद्यार्थियों के बीच नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा सड़क सुरक्षा को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा की आदत बचपन और युवावस्था से विकसित होगी तभी भविष्य में दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
CSR फंड से हेलमेट वितरण और जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर
बैठक में उन्होंने जिले में कार्यरत औद्योगिक संस्थानों, कंपनियों एवं सामाजिक संगठनों (NGO) से अपील की कि वे अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का उपयोग हेलमेट वितरण, सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों में करें।
उन्होंने कहा कि प्रशासन, समाज और निजी संस्थानों के संयुक्त प्रयास से ही सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाया जा सकता है।
हर वाहन में दस्तावेज और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य
न्यायमूर्ति सप्रे ने निर्देश दिए कि जिले में चलने वाले प्रत्येक वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से होने चाहिए। इनकी नियमित जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
“दुर्घटना में मौत से ज्यादा पीड़ा गंभीर रूप से घायल व्यक्ति और उसके परिवार को होती है”
बैठक के दौरान न्यायमूर्ति सप्रे ने भावुक होते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि उसके पीछे पूरा परिवार टूट जाता है। कई बार दुर्घटना में व्यक्ति जीवित तो बच जाता है लेकिन जीवनभर गंभीर चोटों और विकलांगता के साथ संघर्ष करता है, जिससे परिवार पर आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार का भारी बोझ पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
हर सप्ताह हो सड़क सुरक्षा की समीक्षा
उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठक केवल औपचारिकता न बने। हर माह होने वाली बैठकों के साथ-साथ आवश्यकता अनुसार साप्ताहिक अथवा प्रतिदिन छोटी समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएं ताकि दुर्घटनाओं के कारणों का तत्काल विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना जहां हुई, वहां जाकर कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए और सड़क डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था या अन्य कमियों को तुरंत दूर किया जाए।
छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा
न्यायमूर्ति सप्रे ने स्पष्ट किया कि छह माह बाद वह स्वयं पुनः जिले का दौरा करेंगे और दिसंबर तक सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति की कार्यवाही की स्वयं सर्वोच्च न्यायालय लगातार निगरानी करता है और देशभर की प्रगति पर नियमित रिपोर्ट ली जाती है।
विदेशों का उदाहरण देते हुए कहा—नियम पालन से ही बदलती है तस्वीर
उन्होंने वियतनाम, थाईलैंड और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लगभग हर दोपहिया चालक हेलमेट पहनता है और यातायात नियमों का पालन करता है। यदि भारत में भी नागरिक स्वयं नियमों का पालन करने लगें तो सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों सवारों द्वारा हेलमेट पहनने से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आती है, इसलिए केवल चालक ही नहीं बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट आवश्यक होना चाहिए।
कलेक्टर बोले—जीरो फैटलिटी की दिशा में हर संभव प्रयास करेंगे
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने आश्वस्त किया कि न्यायमूर्ति सप्रे द्वारा दिए गए सभी निर्देशों को गंभीरता से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार सड़कों से आवारा गौवंश हटाकर गौशालाओं में भेज रहा है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
उन्होंने बताया कि नई सड़कों के निर्माण में एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क का डिजाइन ऐसा बनाया जाए जिससे अत्यधिक मोड़ और दृश्यता संबंधी समस्याएं न रहें।
कलेक्टर ने कहा कि यदि जीरो फैटलिटी का लक्ष्य पूरी तरह हासिल न भी हो सके तो भी दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में अधिकतम कमी लाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक ने गिनाईं अब तक की उपलब्धियां
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने बैठक में बताया कि जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि—
- जिले में बड़े पैमाने पर सड़क सुरक्षा संबंधी साइन बोर्ड लगाए गए हैं।
- लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
- जिले के 14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां अल्पकालिक सुधार कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
- भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) की विशेषज्ञ टीम द्वारा निरीक्षण कर रिपोर्ट दी गई है, जिसके आधार पर आगे के सुधार कार्य जारी हैं।
- बिना हेलमेट, ओवरस्पीड, ड्रिंक एंड ड्राइव और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है।
ब्लैक स्पॉट और दुर्घटनाओं की विस्तृत प्रस्तुति
बैठक के अंत में यातायात थाना प्रभारी दलबीर सिंह मार्कों ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से जिले में चिन्हित ब्लैक स्पॉट, सड़क सुधार कार्य, दुर्घटनाओं के आंकड़े, यातायात जागरूकता अभियान तथा अब तक की गई प्रवर्तन कार्रवाई की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की अपील
बैठक के समापन पर न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने सभी अधिकारियों से कहा कि सड़क सुरक्षा को केवल सरकारी कार्य न मानें, बल्कि इसे समाज और प्रत्येक परिवार से जुड़ा मानकर काम करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर नियमों का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है और दमोह देश के सामने एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
