दमोह,20 march/ शहर की बहुप्रतीक्षित मॉडल रोड का निर्माण कार्य एक माह से बंद पड़ा है, लेकिन अब यह मामला केवल देरी तक सीमित नहीं रह गया है। निर्माण कार्य को लेकर जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।जटाशंकर तिराहा से महाराणा प्रताप चौराहा तक बनने वाली इस सड़क का चौड़ीकरण बेलाताल मार्ग से होते हुए जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), दाल मिल और मंगलम होटल के सामने से किया जाना है। खास बात यह है कि जहां-जहां शासकीय कार्यालय स्थित हैं, वहां नाले का निर्माण और मुरम डालने का काम तेजी से पूरा कर लिया गया है।
वहीं दूसरी ओर, निजी संस्थानों और प्रतिष्ठानों के सामने अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इसको लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कुछ स्थानों पर “अंदरखाने खेल” चल रहा है, जिसके चलते काम जानबूझकर रोका जा रहा है।सूत्रों की मानें तो प्रभावित निजी पक्षों द्वारा सड़क की ड्राइंग में बदलाव कराने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि उनके प्रतिष्ठानों पर कम प्रभाव पड़े। यही वजह मानी जा रही है कि दाल मिल और मंगलम होटल के सामने अब तक न तो नाला निर्माण हुआ है और न ही सड़क का समुचित चौड़ीकरण शुरू हो पाया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जनप्रतिनिधियों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासकीय परिसरों के सामने काम बिना किसी बाधा के पूरा हो सकता है, तो निजी संस्थानों के सामने देरी क्यों?आम नागरिकों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि चार साल से अधूरी पड़ी सड़क अब भी राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान का शिकार बनी हुई है। रोजाना धूल, कीचड़ और खराब रास्तों से जूझ रहे लोग अब जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा होने की मांग कर रहे हैं।
सीएमओ का पक्ष
मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। अब केवल दो स्वागत गेट हटाए जाने बाकी हैं। उन्होंने बताया कि इन बाधाओं के हटते ही निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा और संभावना है कि मार्च के अंतिम दिनों तक काम को गति मिल जाएगी।
जनता की मांग स्पष्ट
शहरवासियों का कहना है कि किसी भी प्रकार के दबाव या बदलाव से ऊपर उठकर मूल ड्राइंग के अनुसार सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और कब तक यह अधूरी सड़क पूरी हो पाती है।
