धर्मप्रेमियों ने कोरिडोर निर्माण की धीमी गति, अतिक्रमण, पेट्रोल पंप की लीज, जलभराव और श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित कई मुद्दे उठाए
दमोह। प्रदेश और बुंदेलखंड के प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान रखने वाले बांदकपुर धाम के विकास को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से बांदकपुर धाम के समग्र विकास और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठती रही है। शासन स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कोरिडोर विकसित किए जाने की योजना प्रस्तावित है, लेकिन धर्मप्रेमियों का कहना है कि योजना की घोषणा और विकास की चर्चाओं के बावजूद धरातल पर श्रद्धालुओं को अपेक्षित प्रमुख निर्माण और सुविधाएं अभी दिखाई नहीं दे रही हैं।
इसी विषय को लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी भक्त मंदिर ट्रस्ट कमेटी के समक्ष पहुंचे और लिखित पत्र सौंपकर बांदकपुर धाम के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषय उठाए। धर्मप्रेमियों ने कहा कि बांदकपुर धाम केवल स्थानीय धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश और बुंदेलखंड की बड़ी धार्मिक आस्था का केंद्र है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है और विशेष पर्वों तथा कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में धाम का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित न होकर श्रद्धालुओं की सुविधा, धार्मिक स्थलों के संरक्षण, यातायात, पार्किंग, स्वच्छता, जलनिकासी और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट कमेटी की भूमिका पर उठे सवाल
धर्मप्रेमियों का कहना है कि बांदकपुर धाम की व्यवस्थाओं और विकास में वर्षों पुरानी मंदिर ट्रस्ट कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए कमेटी को विकास कार्यों की निगरानी के साथ-साथ शासन और प्रशासन के समक्ष धाम से जुड़े विषयों को मजबूती से रखना चाहिए।बैठक में उपस्थित धर्मप्रेमियों ने कहा कि कोरिडोर निर्माण की प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की बाधा है तो उसे चिन्हित कर समयबद्ध तरीके से दूर किया जाना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए कोरिडोर का पर्याप्त विस्तार और श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्थित योजना तैयार करने की आवश्यकता है।
अतिक्रमण हटाने की मांग
बैठक में कोरिडोर निर्माण में बाधक बताए जा रहे अतिक्रमण को हटाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। धर्मप्रेमियों ने मांग की कि यदि किसी स्थान पर अतिक्रमण विकास कार्य में बाधा बन रहा है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे हटाया जाए।उनका कहना था कि धाम के विकास की योजना पहले से तैयार है तो उसके अनुरूप भूमि का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में स्थानीय लोगों के साथ नियमों के अनुसार व्यवहार तथा पात्र लोगों के पुनर्वास या मुआवजे जैसे विषयों पर भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप का मामला
बैठक में मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप का विषय भी प्रमुखता से सामने आया। धर्मप्रेमियों ने पेट्रोल पंप की लीज समाप्त कर भूमि को मंदिर ट्रस्ट के उपयोग में वापस लेने और भविष्य में इस भूमि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जाने की मांग रखी।ट्रस्ट कमेटी की ओर से बैठक में कथित तौर पर बताया गया कि पेट्रोल पंप की लीज को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है और ट्रस्ट को स्वयं इस भूमि की आवश्यकता है। कमेटी के स्तर पर इस भूमि पर मल्टीस्टोरी धर्मशाला, श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा और वाहन पार्किंग विकसित करने पर विचार किए जाने की बात भी सामने आई।धर्मप्रेमियों ने कहा कि यदि भूमि वास्तव में मंदिर ट्रस्ट की आवश्यकता के लिए वापस ली जाती है तो इसका उपयोग पारदर्शी तरीके से धाम के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए।
जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
बांदकपुर धाम में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। धर्मप्रेमियों ने कहा कि केवल अस्थायी जलनिकासी व्यवस्था से समस्या का समाधान नहीं होगा। कोरिडोर के निर्माण के साथ ही ऐसी ड्रेनेज व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए जिससे भविष्य में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।ट्रस्ट कमेटी की ओर से बताया गया कि जलभराव की समस्या के समाधान के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का अलग प्लान तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। धर्मप्रेमियों ने मांग की कि इस योजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए, ताकि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
राजस्थानी लाल पत्थर और निर्माण की मजबूती का मुद्दा
कोरिडोर निर्माण में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री को लेकर भी चर्चा हुई। धर्मप्रेमियों ने सुझाव दिया कि धाम की भव्यता और लंबे समय तक मजबूती बनाए रखने के लिए राजस्थानी लाल पत्थर का उपयोग किया जाए।उनका कहना था कि बांदकपुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल पर होने वाला निर्माण आने वाली कई पीढ़ियों के लिए उपयोगी होना चाहिए। इसलिए निर्माण की गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, पत्थर, जलनिकासी और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय लेकर कार्य किया जाना चाहिए।
पुराने वृक्षों और मंदिर परिसर के बगीचे के संरक्षण की मांग
बैठक में धाम में मौजूद पुराने वृक्षों, पेड़-पौधों और मंदिर परिसर के बगीचे के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया। धर्मप्रेमियों ने कहा कि विकास के नाम पर पुराने और धार्मिक महत्व वाले वृक्षों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।कोरिडोर की डिजाइन इस प्रकार तैयार किए जाने की मांग की गई कि प्राकृतिक हरियाली और पुराने वृक्षों का अधिकतम संरक्षण हो सके। साथ ही मंदिर परिसर की हरियाली को विकसित करने के लिए विशेष योजना बनाने का सुझाव भी दिया गया।
गोवर्धन पर्वत, रूहानिया क्षेत्र और समाधि स्थल को जोड़ने की मांग
धर्मप्रेमियों ने प्रस्तावित कोरिडोर को केवल मुख्य मंदिर क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय बांदकपुर धाम से जुड़े प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों को भी इससे जोड़ने की मांग की।बैठक में गोवर्धन पर्वत, प्राचीन रूहानिया क्षेत्र तथा दादा नित्यानंद समाधि स्थल को कोरिडोर की योजना में शामिल करने की मांग रखी गई। धर्मप्रेमियों का कहना था कि यदि इन स्थलों को व्यवस्थित मार्ग और सुविधाओं के माध्यम से जोड़ा जाता है तो बांदकपुर धाम का धार्मिक और पर्यटन महत्व और बढ़ सकता है।ट्रस्ट कमेटी की ओर से इन स्थलों को प्रस्तावित विकास योजना से जोड़ने पर विचार किए जाने की बात कही गई।
कांवड़ यात्रियों की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने की मांग
बांदकपुर धाम में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए कांवड़ यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाओं की मांग की गई। धर्मप्रेमियों ने कहा कि हजारों कांवड़ यात्रियों के लिए ठहरने, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा, वाहन व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की पूर्व तैयारी होनी चाहिए।बैठक में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित कोरिडोर में कांवड़ यात्रियों के लिए अलग से व्यवस्थित सुविधा क्षेत्र विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि यात्रा के दौरान भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति न बने।
स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों के हितों का भी मुद्दा
धाम के विकास और कोरिडोर निर्माण के दौरान स्थानीय रहवासियों तथा छोटे दुकानदारों के हितों को लेकर भी धर्मप्रेमियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्यों के कारण किसी व्यक्ति की दुकान या आवास प्रभावित होता है तो नियमानुसार उचित मुआवजा, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।विशेष रूप से गरीब और छोटे हिंदू दुकानदारों के हितों की रक्षा करने की मांग की गई। धर्मप्रेमियों ने कहा कि धाम का विकास स्थानीय लोगों को हटाकर नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर किया जाना चाहिए।
पेट्रोल पंप मामले में दबाव के दावे
बैठक के दौरान कमेटी से जुड़े कुछ सदस्यों द्वारा यह दावा भी किया गया कि पेट्रोल पंप संचालक जैन सरपंच के समर्थन में जिले के कुछ राजनेताओं द्वारा मंदिर ट्रस्ट कमेटी पर दबाव बनाया जा रहा है। सदस्यों की ओर से यह भी दावा किया गया कि पिछली बैठक में जैन सरपंच द्वारा खाली चेक बुक रखने तथा अन्य प्रलोभन दिए जाने की बात सामने आई थी।हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को बैठक में रखे गए दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
कमेटी की ओर से कथित तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि पेट्रोल पंप की भूमि को वापस लेने की दिशा में कार्य किया जा रहा है और भविष्य में इसका उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए करने पर विचार है।
लिखित आश्वासन की मांग, पावती नहीं मिलने पर भी सवाल
बैठक के दौरान उपस्थित धर्मप्रेमियों ने मंदिर ट्रस्ट कमेटी से मांग की कि बैठक में जिन विषयों पर आश्वासन दिए गए हैं, उनका लिखित आश्वासन पत्र उपलब्ध कराया जाए। धर्मप्रेमियों के अनुसार अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा लिखित आश्वासन देने की बात कही गई, लेकिन बाद में यह पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।धर्मप्रेमियों ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में प्रस्तुत किए गए आवेदन की पावती तक मंदिर प्रबंधक द्वारा नहीं दी गई। इसको लेकर भी उपस्थित लोगों ने नाराजगी जताई।
अब धर्मप्रेमियों की नजर इस बात पर है कि बैठक में किए गए आश्वासन कब तक धरातल पर दिखाई देते हैं। विशेष रूप से अतिक्रमण हटाने, पेट्रोल पंप की भूमि वापस लेने, जलभराव की समस्या का समाधान, कोरिडोर निर्माण की गति बढ़ाने और धार्मिक स्थलों को विकास योजना से जोड़ने जैसे विषयों पर कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी रहे मौजूद
बांदकपुर धाम के विकास से जुड़े इस बैठक में जिलेभर से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी भक्त उपस्थित रहे। इनमें दिव्यांग भक्त कपिल मिश्रा, वरिष्ठ हाकम सिंह लोधी, पूर्व जिलाध्यक्ष लोधी समाज, राष्ट्रीय हिंदू परिषद अध्यक्ष सूर्यकांत द्विवेदी, उद्यम सिंह, चैन सिंह लोधी, बांदकपुर बजरंग दल से अरविंद पाठक, मनोज गर्ग, दुकानदार आशय दुबे, कांवड़ मंडल से अवध विश्वकर्मा, राजेश पटेल, मुकेश लोधी, दीपेश पाण्डेय, कार्तिक राजपूत, मगन वाजपेई, कैलाश सिंह, महेंद्र सिंह लोधी, अजय सिंह लोधी, त्रिलोक सिंह, लक्ष्मण सिंह सहित ब्राह्मण समाज दमोह से अनिल वैरागी अधिवक्ता, वेद दुबे, कमलेश समदरिया, राम गौतम सहित अन्य धर्मप्रेमी शामिल रहे।
बांदकपुर धाम के विकास को लेकर अब मुख्य सवाल यही है कि प्रस्तावित करोड़ों रुपये की विकास योजना और बैठक में सामने आए सुझावों एवं आश्वासनों के बीच धरातल पर कितनी तेजी से बदलाव दिखाई देता है। धर्मप्रेमियों का कहना है कि बांदकपुर की धार्मिक महत्ता को देखते हुए विकास कार्य केवल कागजों और बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं और धाम को व्यवस्थित स्वरूप वास्तविक रूप से दिखाई देना चाहिए।
