युवक की हत्या के मामले में विशेष न्यायालय का फैसला, एससी/एसटी अधिनियम के तहत भी सुनाई गई उम्रकैद की सजा
दमोह। शहर के खजरी मोहल्ला क्षेत्र में मार्च 2024 में हुई अंकेश उर्फ अंकू राय की हत्या के मामले में आज 28 सितंबर सोमवार को विशेष न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी की अदालत ने प्रकरण में आरोपी शुभम राठौर और शोभित राठौर उर्फ कुक्की को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत भी दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास तथा 1000-1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। आरोपी शुभम राठौर को भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत अतिरिक्त रूप से 2 वर्ष के कठोर कारावास और 200 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
छत से नीचे फेंकने और सिलेंडर से हमला करने का आरोप
अभियोजन के अनुसार 18 एवं 19 मार्च 2024 की दरम्यानी रात करीब 2 बजे खजरी मोहल्ला में घटना हुई थी। 19 मार्च को थाना दमोह कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि परषोत्तम राठौर के घर के सामने एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की गई। मृतक की पहचान लब्बू राय उर्फ सुरेन्द्र राय के पुत्र अंकेश उर्फ अंकू राय के रूप में हुई।
मर्ग जांच के दौरान घटना से संबंधित तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। अभियोजन के अनुसार अंकेश किसी व्यक्ति से मिलने के लिए छत पर गया था। इसी दौरान शुभम राठौर और उसके चचेरे भाई शोभित राठौर ने उसके साथ मारपीट की और उसे छत से नीचे फेंक दिया। अभियोजन के मुताबिक इसके बाद दोनों आरोपी नीचे पहुंचे और गैस सिलेंडर से उसके सिर पर हमला किया। गंभीर चोटों के चलते अंकेश की मृत्यु हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटना से जुड़े साक्ष्यों को एकत्र किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। विवेचना के दौरान आरोपियों के मेमोरेण्डम कथन दर्ज किए गए तथा अन्य आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर न्यायालय ने किया विचार
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित घटनाक्रम से संबंधित परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। अभियोजन ने अपने तर्कों के माध्यम से आरोपियों की भूमिका को प्रमाणित करने का प्रयास किया।न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अभियोजन पक्ष के तर्कों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी माना। इसके बाद न्यायालय ने आज 28 सितंबर सोमवार को दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
किन धाराओं में हुई सजा
न्यायालय के निर्णय के अनुसार आरोपी शुभम राठौर पिता परषोत्तम राठौर, उम्र 22 वर्ष तथा शोभित राठौर उर्फ कुक्की पिता दुलीचंद राठौर, उम्र 25 वर्ष, दोनों निवासी खजरी मोहल्ला, सिविल वार्ड नंबर-9, थाना दमोह कोतवाली, जिला दमोह को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 1000-1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
इसी प्रकार एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत भी दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। आरोपी शुभम राठौर को धारा 201 के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास एवं 200 रुपये अर्थदंड की अतिरिक्त सजा दी गई।
अभियोजन की ओर से की गई पैरवी
प्रकरण में अभियोजन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सतीश कपस्या, दमोह ने पैरवी की। सहायक तरुण कुमार सोनी ने भी प्रकरण में आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
फैसले से सामने आया कानून की प्रक्रिया का संदेश
खजरी मोहल्ला की इस घटना ने मार्च 2024 में क्षेत्र में चर्चा पैदा की थी। अब करीब ढाई वर्ष बाद न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले से मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव आया है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि करते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया है।यह फैसला इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट और न्यायालय में प्रस्तुत अभियोजन साक्ष्य के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है। किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम दोषसिद्धि अथवा दंड न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही निर्धारित होता है।खजरी मोहल्ला हत्याकांड में आज सुनाया गया फैसला इसी न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद दोनों आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
