दमोह न्यायालय का फैसला, दोनों दोषियों पर 2-2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
दमोह। सरकारी क्वार्टर का ताला तोड़कर नकदी चोरी करने के मामले में दमोह न्यायालय ने दो आरोपियों को तीन-तीन माह के साधारण कारावास एवं 2-2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला जून 2020 का है, जिसमें फरियादी के शासकीय आवास से करीब 11 हजार रुपये की नकदी चोरी होने की घटना सामने आई थी। प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायालय श्रीमती दीर्घा ऐरन, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला दमोह ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया।
प्रकरण में दोषसिद्ध किए गए आरोपियों की पहचान कैलाश पिता कल्ला वंशकार, उम्र 25 वर्ष तथा सूरज उर्फ मुकेश सिंह पिता राजाराम वंशकार, उम्र 25 वर्ष, दोनों निवासी कैदो की तलैया, सिविल वार्ड क्रमांक 3, दमोह के रूप में हुई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 457 सहपठित धारा 34 तथा धारा 380 सहपठित धारा 34 के अंतर्गत दोषसिद्ध पाते हुए तीन-तीन माह के साधारण कारावास और 2-2 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
ताला तोड़कर घर में घुसे, अलमारी से नकदी चोरी
अभियोजन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 17 जून 2020 की है। फरियादी अपने शासकीय क्वार्टर में ताला लगाकर छिंदवाड़ा गया हुआ था। उसका क्वार्टर दमोह में कीर्ति स्तंभ चौराहे के समीप भाजपा कार्यालय के बाजू में स्थित था। फरियादी जब 22 जून 2020 को सुबह लगभग 11:30 बजे छिंदवाड़ा से वापस अपने शासकीय आवास पहुंचा, तो उसे क्वार्टर के बाहरी गेट का ताला टूटा हुआ मिला।इसके बाद जब उसने अंदर जाकर देखा, तो कमरे के दरवाजे का ताला भी टूटा हुआ था और दरवाजे खुले हुए थे। कमरों में सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था। लकड़ी की अलमारी का ताला भी टूटा हुआ मिला। जांच करने पर पता चला कि दराज में रखे लगभग छह हजार रुपये तथा गुल्लक में रखे करीब पांच हजार रुपये गायब थे। इस प्रकार कुल लगभग 11 हजार रुपये की नकदी चोरी होने की जानकारी सामने आई।घटना की जानकारी मिलने के बाद फरियादी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की। विवेचना के दौरान घटना से संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्रित किया गया।
साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में पेश हुआ चालान
विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्षियों के कथन दर्ज किए तथा घटनास्थल का नक्शा तैयार करने सहित जब्ती, गिरफ्तारी, मेमोरेंडम और अन्य आवश्यक कार्रवाई की। संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध प्रमाणित पाए जाने पर अभियोग पत्र क्रमांक 709/20 तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के दौरान मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर विचार किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं के अंतर्गत दोषसिद्ध ठहराते हुए सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से की गई पैरवी
इस प्रकरण में सहायक निदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सुश्री हेमा वर्मा द्वारा अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की गई।न्यायालय के इस निर्णय में सरकारी आवास में ताला तोड़कर प्रवेश करने और नकदी चोरी करने से संबंधित मामले में आरोपियों को दोषसिद्ध ठहराते हुए कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है।
