(डॉ एल एन वैष्णव)

दमोह/ जिले के पथरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बांसा कला से निजी भूमि पर जबरन कब्जा और सीसी सड़क निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय दबंगों, सरपंच और सचिव पर मिलीभगत कर पुश्तैनी जमीन पर जबरदस्ती निर्माण कराने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मिलकर प्रमाण और तर्क सहित आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
जबरन कब्जे और धमकियों का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि उनकी निजी भूमि पर बिना अनुमति के सड़क निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि गजराज, गणेश, प्यारेलाल, मोतीलाल, लक्ष्मण तथा दौलत के लड़कों सहित कुछ लोग सरपंच के साथ मौके पर पहुंचे और जबरदस्ती काम शुरू करा दिया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो उन्हें गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी शराब के नशे में घर आकर हंगामा करते हैं और बच्चों सहित पूरे परिवार को डराते हैं। उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनकी जमीन ही आजीविका का मुख्य साधन है, जिसे छीने जाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरपंच और सचिव पर मिलीभगत का आरोप
पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरपंच और सचिव असगर अली की मिलीभगत से निजी भूमि पर सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य किसी शासकीय योजना के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन भूमि स्वामी की सहमति नहीं ली गई। पीड़ितों ने दावा किया कि उनके पास जमीन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने प्रशासन को सौंप दिया है।
कलेक्टर से मुलाकात, प्रमाण सहित दी शिकायत
मामले को लेकर चंदू पिता शंकर पटेल, दयाराम पिता शंकर पटेल, रेवाराम पिता धर्मदास पटेल तथा भगोनी पिता जगन पटेल ने कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर से मिलकर विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की। शिकायतकर्ताओं ने भूमि के दस्तावेज, मौके की स्थिति और आरोपों से संबंधित प्रमाण भी दिए।प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं और संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल
पीड़ितों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान सीसी रोड निर्माण में आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क पर बेस लेयर नहीं डाली गई और पर्याप्त पानी का उपयोग भी नहीं किया जा रहा। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने और सड़क के जल्द खराब होने की आशंका जताई जा रही है।पीड़ितों का कहना है कि यदि यह कार्य शासकीय योजना के अंतर्गत किया जा रहा है, तो बिना तकनीकी मानकों के निर्माण कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे संबंधित इंजीनियर और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए।
प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल
मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि निजी भूमि पर निर्माण की अनुमति किसने दी और क्या संबंधित विभाग को भूमि स्वामित्व की जानकारी थी। पीड़ितों का कहना है कि यदि भूमि निजी है, तो निर्माण कार्य रोककर पहले विवाद का समाधान किया जाना चाहिए था।पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी योजना का हवाला देकर जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, जमीन की पैमाइश और निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।
जिम्मेदारों का पक्ष
मामले में सरपंच से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं सचिव असगर अली का कहना है कि निर्माण कार्य नियमानुसार किया जा रहा है और आरोप निराधार हैं।
पीड़ित परिवार ने मांगी सुरक्षा
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा की भी मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य रोका जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर टिकी हुई है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण शासकीय योजना के तहत हो रहा है या निजी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला है। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी।पीड़ितों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी गरीब की जमीन पर इस तरह कब्जे की कोशिश न हो सके।
