उमरी गांव में वर्ष 2022 में हुई घटना का न्यायालय ने किया निराकरण, तीनों आरोपियों पर 1500-1500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया
दमोह। ग्राम उमरी में वर्ष 2022 में महिला के साथ विवाद के दौरान ब्लेड से हमला करने और उसके परिजनों के साथ मारपीट किए जाने के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 3-3 माह के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 1500-1500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दमोह की न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट दीर्घा ऐरन द्वारा सुनाया गया। प्रकरण में ग्राम उमरी, थाना दमोह देहात निवासी भगवानदास पिता घनश्याम अहिरवार उम्र 69 वर्ष, हेमराज पिता शिवप्रसाद अहिरवार उम्र 34 वर्ष और गोविंद पिता गोटी अहिरवार उम्र 34 वर्ष को दोषी पाया गया।
मामले के अनुसार 8 मई 2022 को सुबह करीब 11 बजे ग्राम उमरी निवासी मोनिका देवी शौचालय से वापस अपने घर की ओर लौट रही थीं। इसी दौरान आरोपियों से उनका विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर गोविंद ने मोनिका देवी का हाथ पकड़ लिया, जबकि हेमराज ने ब्लेड से उन पर हमला कर दिया। ब्लेड लगने से मोनिका देवी घायल हो गईं और उनके शरीर से रक्तस्राव होने लगा।
घटना के दौरान मोनिका देवी को बचाने के लिए उनके भाई गुलशन मौके पर पहुंचे। अभियोजन के अनुसार हेमराज ने गुलशन के साथ धक्का-मुक्की की। वहीं मोनिका देवी के छोटे भाई कुंदन के साथ भगवानदास द्वारा लाठी से मारपीट की गई।घटना के बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की और जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से घटना से संबंधित साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए। अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध होने के संबंध में न्यायालय के समक्ष तर्क रखे।प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तर्कों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने भगवानदास अहिरवार, हेमराज अहिरवार और गोविंद अहिरवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 324 एवं 34 के तहत दोषी माना। न्यायालय ने तीनों को 3-3 माह के कारावास तथा 1500-1500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किए जाने का आदेश दिया।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के नेतृत्व में एडीपीओ हेमा वर्मा ने पैरवी की।करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में आए न्यायालयीन फैसले के बाद प्रकरण का विधिक रूप से निराकरण हुआ है। न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा यह भी दर्शाती है कि आपसी विवाद में हिंसा का सहारा लेना कानून की नजर में अपराध है और ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों की जवाबदेही तय की जाती है।
