रक्त की कमी आज भी दुनिया की बड़ी चुनौती, हर वर्ष लाखों लोगों की जिंदगी बचाते हैं स्वैच्छिक रक्तदाता

(डॉ. एल.एन.वैष्णव)
दमोह। मानव जीवन के लिए जितना महत्वपूर्ण वायु, जल और भोजन है, उतना ही महत्वपूर्ण रक्त भी है। चिकित्सा विज्ञान ने भले ही अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति कर ली हो, लेकिन आज भी रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। यही कारण है कि रक्तदान को संसार का सबसे बड़ा महादान कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में प्रतिवर्ष करोड़ों यूनिट रक्त एकत्र किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद अनेक देशों में रक्त की उपलब्धता आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो पाती। सड़क दुर्घटनाओं, प्रसवकालीन जटिलताओं, कैंसर, थैलेसीमिया, बड़ी सर्जरी और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाखों मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण जीवन संकट में पड़ जाता है।
रक्त की कमी से हर वर्ष लाखों जीवन प्रभावित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के अनेक देशों में आज भी सुरक्षित रक्त की उपलब्धता एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में रक्त की कमी के कारण हजारों मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, दुर्घटनाओं में गंभीर चोट, रक्त संबंधी रोग और बड़ी शल्य चिकित्सा के दौरान रक्त की आवश्यकता जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक भूमिका निभाती है।
भारत में भी प्रतिवर्ष लाखों यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। हालांकि सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों से बड़ी मात्रा में रक्त संग्रह किया जाता है, लेकिन आवश्यकता और उपलब्धता के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है।
रक्तदान क्यों है जीवनदान?
विशेषज्ञों के अनुसार एक यूनिट रक्त केवल एक मरीज के ही नहीं बल्कि तीन अलग-अलग मरीजों के जीवन बचाने में सहायक हो सकता है। इसका कारण यह है कि रक्त को विभिन्न घटकों में विभाजित किया जाता है।
- रेड ब्लड सेल्स (RBC)
- प्लेटलेट्स
- प्लाज्मा
इन तीनों घटकों का उपयोग अलग-अलग मरीजों के उपचार में किया जाता है। उदाहरण के लिए कैंसर और डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है, जबकि दुर्घटना पीड़ितों और ऑपरेशन वाले मरीजों को संपूर्ण रक्त या रेड सेल्स की जरूरत पड़ती है।
कौन कर सकता है रक्तदान?
चिकित्सकों के अनुसार 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदाता का वजन सामान्यतः 45 से 50 किलोग्राम से अधिक होना चाहिए तथा उसका हीमोग्लोबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
रक्तदान से पहले स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्तदाता पूरी तरह स्वस्थ है। पुरुष लगभग हर तीन माह में और महिलाएं चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित अंतराल पर रक्तदान कर सकती हैं।
रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियां
समाज में आज भी कई लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। चिकित्सा विशेषज्ञ इन धारणाओं को पूरी तरह गलत बताते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्तदान की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होती है और शरीर कुछ ही दिनों में रक्त की कमी की पूर्ति कर देता है। रक्तदान के दौरान उपयोग किए जाने वाले उपकरण पूर्णतः सुरक्षित और एक बार उपयोग के बाद नष्ट कर दिए जाते हैं।
रक्त के प्रमुख प्रकार
मानव शरीर में मुख्य रूप से आठ प्रकार के रक्त समूह पाए जाते हैं—
- A+
- A-
- B+
- B-
- AB+
- AB-
- O+
- O-
इन रक्त समूहों का निर्धारण लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजन के आधार पर किया जाता है। रक्त चढ़ाने से पहले रक्त समूह का मिलान करना अत्यंत आवश्यक होता है।
सबसे दुर्लभ रक्त समूह कौन सा?
सामान्य रक्त समूहों में AB Negative (AB-) सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक माना जाता है। आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही इस रक्त समूह का होता है।
वहीं चिकित्सा विज्ञान में Rh-null रक्त समूह को दुनिया का सबसे दुर्लभ रक्त माना जाता है। इसे “गोल्डन ब्लड” भी कहा जाता है। विश्वभर में ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है, जिसके कारण इसकी उपलब्धता अत्यंत कठिन होती है।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्तदाता हैं जीवनरेखा
थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों के लिए स्वैच्छिक रक्तदाता किसी जीवनदूत से कम नहीं होते। रक्तदान करने वाले लोग प्रत्यक्ष रूप से इन बच्चों को सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।
रक्तदान से रक्तदाता को भी लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रक्तदान से शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके साथ ही रक्तदाता का स्वास्थ्य परीक्षण भी हो जाता है, जिससे कई बीमारियों की प्रारंभिक जानकारी मिल सकती है।
हालांकि रक्तदान का सबसे बड़ा लाभ मानसिक और सामाजिक संतोष है। किसी अनजान व्यक्ति की जान बचाने का सुख और आत्मिक संतोष किसी भी भौतिक उपलब्धि से बड़ा माना जाता है।
युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
भारत जैसे युवा देश में रक्तदान आंदोलन को सफल बनाने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं यदि नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करें तो रक्त की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक स्वस्थ नागरिक यदि वर्ष में कम से कम एक बार भी रक्तदान करे तो देश में रक्त की कमी लगभग समाप्त हो सकती है।
विश्व रक्तदाता दिवस का संदेश
विश्व रक्तदाता दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे द्वारा दिया गया कुछ मिनटों का समय और एक यूनिट रक्त किसी व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है।
जब कोई व्यक्ति रक्तदान करता है, तो वह केवल रक्त नहीं देता बल्कि किसी मां को उसका बेटा, किसी बच्चे को उसका पिता, किसी परिवार को उसकी उम्मीद और किसी मरीज को जीवन का दूसरा अवसर देता है।
आइए, विश्व रक्तदाता दिवस पर संकल्प लें कि हम स्वयं रक्तदान करेंगे, दूसरों को इसके लिए प्रेरित करेंगे और समाज में यह संदेश फैलाएंगे कि “रक्तदान महादान है, क्योंकि रक्त का कोई विकल्प नहीं और जीवन से बड़ा कोई उपहार नहीं।”
