वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायत पर जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, अब शासन के सामने देना होगा जवाब
दमोह। दमोह नगर पालिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक स्तर तक पहुंचने के बाद नए मोड़ पर आ गया है। नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर से फिलहाल राहत नहीं मिली है। शासन द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए प्रस्तुत की गई उनकी रिट याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से शुरू की गई प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, नगर पालिका में वित्तीय अनियमितताओं, कथित भ्रष्टाचार, नियमों के विपरीत निर्णय लेने और परिषद का मनमाने ढंग से संचालन किए जाने संबंधी आरोपों को लेकर नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष विजय जैन ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल तथा लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में नगर पालिका के कामकाज और विभिन्न निर्णयों की जांच कराए जाने की मांग की गई थी।
शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने जांच कराई। जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 22 अक्टूबर 2026 को नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
नोटिस में उठाए गए कई गंभीर सवाल
शासन की ओर से जारी नोटिस में नगर पालिका परिषद की बैठकों के आयोजन, कार्यवाही पुस्तिका के संधारण तथा विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं सहित कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इन मामलों को लेकर अध्यक्ष से जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।
हाईकोर्ट में चुनौती, लेकिन नहीं मिली राहत
शासन के नोटिस को चुनौती देते हुए नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में प्रारंभिक जांच के दौरान सुनवाई का अवसर नहीं दिए जाने सहित अन्य आधारों पर शासन की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। न्यायालय के रुख के अनुसार कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्ष को पहले अपना पक्ष और स्पष्टीकरण शासन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। केवल नोटिस जारी होने के आधार पर न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं माना गया।
अब शासन के जवाब पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय के सामने शासन के कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने का रास्ता है। उनके जवाब, उपलब्ध दस्तावेजों और जांच समिति के प्रतिवेदन का परीक्षण करने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
इस पूरे मामले में नेता प्रतिपक्ष विजय जैन की शिकायत और उसके आधार पर कराई गई जांच महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। हालांकि, जिन आरोपों को लेकर नोटिस जारी किया गया है, उन पर अभी अंतिम निष्कर्ष आना शेष है। अध्यक्ष का पक्ष और शासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई भी इस प्रकरण में महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद नगर पालिका में उठे इन सवालों पर शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी रहने का रास्ता खुला है।
