ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सरकार ने टैरिफ लागू करने के लिए दूसरी कानूनी व्यवस्थाओं का सहारा लिया है जिनका इस्तेमाल पहले भी विभिन्न अमेरिकी प्रशासन कर चुके हैं। उनके मुताबिक अदालत ने केवल प्रक्रिया बदलने की बात कही थी और सरकार ने उसी दिशा में कदम उठाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कानूनी व्यवस्था के तहत लागू किए गए टैरिफ न्यायिक जांच में भी टिकेंगे।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि टैरिफ नीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर की कंपनियां अब अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए आगे आ रही हैं। उनके अनुसार देश में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित या शुरू हो चुका है जो अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चार वर्षों में निवेश एक ट्रिलियन डॉलर से भी कम रहा जबकि उनकी सरकार ने केवल एक वर्ष में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है।
ट्रंप ने कहा कि यदि टैरिफ लागू नहीं किए गए होते तो अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनका मानना है कि आयात शुल्क ने विदेशी कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि संघीय राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से हाल में शुरू की गई एक व्यापारिक जांच में बाल मजदूरी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने दुनिया के कई देशों की समीक्षा की और बाल मजदूरी भी उन कारणों में शामिल थी जिनके आधार पर कुछ व्यापारिक फैसले लिए गए। हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक विस्तार से टिप्पणी नहीं की।
राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक नीति को ऊर्जा उत्पादन घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि टैरिफ केवल व्यापारिक हथियार नहीं बल्कि अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका वापस लाना और देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है।
इस बीच ट्रंप की टैरिफ नीति पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी हुई है। यूरोपीय संघ चीन और कई एशियाई व्यापारिक साझेदार अमेरिकी व्यापारिक कदमों और उनसे जुड़े कानूनी विवादों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक व्यापार सप्लाई चेन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ट्रंप की बदली हुई कानूनी रणनीति और उनके बड़े आर्थिक दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
