रिपोर्ट के अनुसार लाल सागर में प्रवेश करने से पहले कुछ जहाज हूती विद्रोहियों को ईमेल भेजकर यह पुष्टि मांग रहे हैं कि उन्हें बिना हमले के समुद्री रास्ते से गुजरने दिया जाएगा या नहीं। कथित तौर पर हूती इन ईमेल का जवाब करीब 24 घंटे के भीतर दे रहे हैं। एक जहाज के कप्तान ने अपने संदेश में यह जानकारी दी कि उनके जहाज का इजरायल ब्रिटेन या अमेरिका से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद सुरक्षित रास्ते की अनुमति मांगी गई। इसी तरह चीन के एक कंटेनर जहाज की ओर से भी अनुमति मांगे जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी जहाज को जवाब में हूतियों की ओर से सात दिनों के लिए ट्रांजिट परमिट जारी किया गया। इसके साथ ही जहाज को कथित तौर पर हूतियों के ईमेल अलर्ट सिस्टम से जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया गया ताकि समुद्री मार्ग से जुड़ी नई जानकारी उसे मिलती रहे। अगर यह दावा सही है तो यह लाल सागर में समुद्री यातायात पर हूती विद्रोहियों के प्रभाव को लेकर एक बेहद गंभीर संकेत माना जा सकता है क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि क्या व्यापारी जहाजों को अब सुरक्षित यात्रा के लिए किसी गैर सरकारी सशस्त्र समूह से अनुमति लेनी पड़ रही है।
इसी बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच कथित बातचीत को लेकर भी एक बड़ा दावा सामने आया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने हूतियों के साथ संघर्ष खत्म करने को लेकर बातचीत की संभावनाएं तलाशीं। इसके जवाब में हूतियों की ओर से कथित तौर पर 51 अरब डॉलर की मांग रखे जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम सऊदी अरब के सैन्य अभियानों और लंबे समय तक चली नाकेबंदी से हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर मांगी गई थी। इसके अलावा हूतियों की ओर से सऊदी अरब द्वारा उन्हें यमन के आधिकारिक शासक के रूप में मान्यता देने की मांग किए जाने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया।
हालांकि सऊदी अरब ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री और सार्वजनिक कूटनीति के प्रभारी राजदूत रायद क्रिमली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट को मनगढ़ंत बताया। उन्होंने हूतियों पर यमन की सरकार के खिलाफ जाने और देश को लंबे संघर्ष में धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि हूती लाल सागर में व्यापारिक जहाजों नागरिक ठिकानों और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं।
लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। ऐसे में जहाजों को कथित तौर पर परमिट लेकर गुजरने की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि ईमेल परमिट और 51 अरब डॉलर की मांग से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सऊदी अरब ने रकम संबंधी दावे को खारिज किया है।
