भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर ही शहर का विकास हो रहा है। यानी करीब 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से शहर की व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं जबकि इस दौरान आबादी और शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया मास्टर प्लान समय पर लागू नहीं होने के कारण कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं। अगर शहर के विस्तार के साथ नया मास्टर प्लान लागू होता तो कमर्शियल क्षेत्रों के लिए पहले से जगह तय होती और उसी हिसाब से सड़कें पार्किंग सीवेज बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाता।
अब मिक्स्ड लैंड यूज को संभावित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। यदि सरकार अरेरा कॉलोनी बावड़ियाकलां रोहित नगर समेत कुछ बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल करती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वहां चल रहे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने आप वैध हो जाएंगे। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। संबंधित इलाकों में पार्किंग सीवेज बिजली पानी और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी करनी होगी।
इसके अलावा जिन भवनों को कमर्शियल उपयोग के दायरे में लाया जाएगा उनके डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ सकता है। यह राशि कितनी होगी इसका फैसला सरकार करेगी। विशेषज्ञ के अनुसार डायवर्सन की प्रक्रिया में भी करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है। यानी मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा।
पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई भी बेहद अहम मानी जा रही है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। साथ ही हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत वाले आदेश भी निरस्त कर दिए गए थे। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी है।
इसी के चलते भोपाल में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई। एक सप्ताह में आठ हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए जबकि करीब 190 प्रतिष्ठान स्वेच्छा से या सीलिंग के जरिए बंद किए गए। निगम को कुल 62 हजार नोटिस जारी करने थे लेकिन शुरुआती कार्रवाई में ही व्यापारियों और रहवासियों का विरोध सामने आ गया।
निगम की कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। रोशनपुरा और न्यू मार्केट में प्रदर्शन हुआ तो कोलार रोड समेत कई इलाकों में बाजार बंद रखे गए। अवधपुरी और रायसेन रोड पर भी विरोध देखने को मिला। अब सभी की निगाहें सरकार के नए मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर हैं। फिलहाल इतना साफ है कि मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी राहत की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों को नियमों के साथ डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।
